सार्वजनिक पोखर पर PACS गोदाम निर्माण पर हाईकोर्ट की रोक, किसानों-ग्रामीणों में राहत

  • Post By Admin on Aug 14 2026
सार्वजनिक पोखर पर PACS गोदाम निर्माण पर हाईकोर्ट की रोक, किसानों-ग्रामीणों में राहत

लखीसराय: प्रतापपुर पैक्स, प्रखंड हलसी, जिला लखीसराय में सार्वजनिक उपयोग वाले पोखर की भूमि पर प्रस्तावित PACS गोदाम निर्माण के मामले में पटना उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित करते हुए फिलहाल निर्माण प्रस्ताव पर रोक लगा दी है। अदालत के इस आदेश के बाद स्थानीय किसानों और ग्रामीणों में राहत की भावना देखी जा रही है।

यह मामला Civil Writ Jurisdiction Case No. 9981 of 2026, सुजान यादव बनाम राज्य सरकार एवं अन्य के रूप में पटना उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। मामले की सुनवाई 7 अगस्त 2026 को माननीय कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधीर सिंह और माननीय न्यायमूर्ति राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष हुई।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने प्रथम दृष्टया यह माना कि यदि संबंधित भूमि ग्राम पोखर की श्रेणी में आती है, तो उस पर निर्माण कार्य किए जाने से जलाशय की प्रकृति और स्वरूप में परिवर्तन हो सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ग्राम पोखर जैसी सार्वजनिक जल-स्रोत वाली भूमि को सामान्यतः निर्माण कार्य के लिए परिवर्तित नहीं किया जा सकता, जब तक कि कानून के तहत इसकी अनुमति और निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन न किया गया हो। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर प्रति-शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है तथा संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया गया है। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत ने अंतरिम व्यवस्था के तहत आदेश दिया है कि यदि विवादित भूमि पर PACS गोदाम निर्माण का कोई प्रस्ताव है, तो उसे फिलहाल लंबित या स्थगित रखा जाए। यानी अंतिम निर्णय आने तक निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ाया जा सकेगा।

स्थानीय किसानों का कहना है कि संबंधित पोखर का उपयोग वर्षों से आसपास की सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई के लिए किया जाता रहा है। इसके अलावा पशुपालन करने वाले ग्रामीण भी इसी जल-स्रोत पर निर्भर हैं। किसानों ने आशंका जताई थी कि यदि पोखर को भरकर या उसकी प्रकृति बदलकर निर्माण किया गया, तो सिंचाई व्यवस्था, जल-संचयन और पशुपालकों की आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसी आशंका को लेकर स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने पहले प्रशासन के समक्ष भी आवेदन देकर निर्माण कार्य पर रोक लगाने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की थी। अब उच्च न्यायालय के आदेश को ग्रामीणों ने जनहित और जल-स्रोत संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि अदालत के आदेश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए और विवादित पोखर की भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से रोका जाए। साथ ही भूमि की प्रकृति, अभिलेखों और राजस्व रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सार्वजनिक जल-स्रोतों और सिंचाई के साधनों की रक्षा केवल किसानों का मुद्दा नहीं, बल्कि व्यापक जनहित से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन ऐसे विकास की आवश्यकता है जो जल-संचयन, पर्यावरण और ग्रामीण आजीविका को नुकसान पहुंचाए बिना आगे बढ़े। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी, जिस पर अब किसानों, ग्रामीणों और प्रशासन की नजरें टिकी हुई हैं।