‘लालच का जाल’ नाटक का मंचन, साइबर अपराध और डिजिटल ब्लैकमेलिंग के प्रति किया जागरूक

  • Post By Admin on Oct 27 2026
 ‘लालच का जाल’ नाटक का मंचन, साइबर अपराध और डिजिटल ब्लैकमेलिंग के प्रति किया जागरूक

पटना: डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराध, ऑनलाइन ठगी और डिजिटल ब्लैकमेलिंग के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 26 अक्टूबर 2026 को लोक पंच, पटना की ओर से भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), गांधी मैदान, पटना के प्रांगण में सामाजिक नाटक ‘लालच का जाल’ का मंचन किया गया। एसबीआई के सहयोग से प्रस्तुत इस नाटक का लेखन एवं निर्देशन मनीष महिवाल ने किया। नाटक में मनोरंजक और भावनात्मक घटनाओं के माध्यम से यह दिखाया गया कि थोड़े से लालच, डर या लापरवाही के कारण आम लोग किस तरह साइबर अपराधियों के जाल में फंस सकते हैं।

नाटक की कहानी में साइबर अपराध के अलग-अलग तरीकों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। इसमें खास तौर पर युवाओं को पार्ट-टाइम नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी, बैंक खातों के दुरुपयोग और फर्जी वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल ब्लैकमेलिंग से सावधान रहने का संदेश दिया गया।

नाटक की पहली कहानी अमित नामक कॉलेज छात्र की है, जो अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पार्ट-टाइम नौकरी की तलाश करता है। घर बैठे आसानी से हजारों रुपये कमाने के लालच में वह साइबर अपराधियों के संपर्क में आ जाता है। अपराधी उसके बैंक खाते के माध्यम से ठगी की रकम दूसरे खातों में स्थानांतरित करवाते हैं और बदले में उसे कमीशन देते हैं। इस तरह अनजाने में अमित का बैंक खाता ‘मनी म्यूल अकाउंट’ बन जाता है, जिसका इस्तेमाल अवैध पैसों के लेन-देन के लिए किया जाता है। बाद में साइबर सेल द्वारा उसका खाता फ्रीज किए जाने पर उसे अपनी गलती और उसके गंभीर कानूनी परिणामों का एहसास होता है। यह कहानी युवाओं को अनजान लोगों के कहने पर अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने देने के खतरे के प्रति सचेत करती है।

नाटक की दूसरी कहानी राहुल की है, जो फर्जी वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल ब्लैकमेलिंग का शिकार हो जाता है। सामाजिक बदनामी के भय से वह साइबर अपराधियों को पैसे देने लगता है, लेकिन उनकी मांग लगातार बढ़ती जाती है। इस कारण वह गहरे मानसिक तनाव और निराशा में घिर जाता है। अंततः वह हिम्मत जुटाकर अपने दोस्त से मदद मांगता है और साइबर सेल तक पहुंचता है। यह घटनाक्रम संदेश देता है कि डिजिटल ब्लैकमेलिंग का शिकार होने पर डरकर अपराधियों की मांगें पूरी करते रहना समाधान नहीं है। समय रहते किसी विश्वसनीय व्यक्ति और संबंधित पुलिस या साइबर सेल से सहायता लेना जरूरी है।

‘लालच का जाल’ केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से दर्शकों को डिजिटल सुरक्षा और साइबर अपराध से बचाव के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया। नाटक ने बताया कि अनजान व्यक्तियों को बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी या अन्य संवेदनशील विवरण देना, बिना सत्यापन के ऑनलाइन नौकरी के प्रस्तावों पर भरोसा करना और ब्लैकमेलिंग के डर से चुप रहना गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है। साइबर अपराध की स्थिति में घबराने के बजाय सबूत सुरक्षित रखना और समय पर आधिकारिक सहायता लेना महत्वपूर्ण है।

नाटक का मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से युवाओं को साइबर अपराध के नए तरीकों से परिचित कराना, ऑनलाइन ठगी के प्रति सतर्क करना और पीड़ितों को बिना भय के शिकायत करने के लिए प्रेरित करना था। इसकी कहानियों ने यह संदेश दिया कि डिजिटल दुनिया में जागरूकता, सावधानी और साहस ही साइबर अपराधियों के जाल से बचने के प्रभावी उपाय हैं। इस नाटक में मृत्युंजय प्रसाद, रजनीश पांडे, अभिषेक राज, रोहित कुमार, सोनल कुमारी, प्रिंस, गौतम एवं मनीष महिवाल ने अभिनय किया। नाटक की प्रस्तुति के माध्यम से लोक पंच ने सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषय को रंगमंच के जरिए लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया।