अनंत सिंह के निष्कासन पर बिहार की सियासत गर्म, जदयू में गुटबाजी के आरोप पर बोले चिराग

  • Post By Admin on Oct 25 2026
अनंत सिंह के निष्कासन पर बिहार की सियासत गर्म, जदयू में गुटबाजी के आरोप पर बोले चिराग

पटना: बिहार की राजनीति में मोकामा विधायक अनंत सिंह को जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, जदयू और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेताओं ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। जहां चिराग पासवान ने इसे जदयू का आंतरिक मामला बताया, वहीं राजद ने पार्टी में गुटबाजी का आरोप लगाते हुए निष्कासन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, जदयू ने कार्रवाई को पार्टी अनुशासन से जोड़ते हुए अनंत सिंह पर लगातार पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने का आरोप लगाया है।

चिराग पासवान बोले- जदयू का आंतरिक मामला

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने अनंत सिंह के निष्कासन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह जनता दल यूनाइटेड का आंतरिक मामला है और पार्टी से जुड़े विषयों पर उसी को निर्णय लेना है। उन्होंने कहा कि गठबंधन सहयोगी होने के नाते किसी दूसरे दल के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। चिराग के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में जदयू को क्या कदम उठाना चाहिए, इसका फैसला पार्टी नेतृत्व को ही करना है।

श्याम रजक ने कहा- उचित समय पर लिया गया फैसला

जदयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने कार्रवाई को लेकर कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता पहले से ही पूरे मामले को गंभीरता से ले रहे थे। उन्होंने बताया कि मामले की समीक्षा के बाद उचित समय पर निर्णय लेने की बात पहले ही कही गई थी। अब पार्टी ने अनंत सिंह को छह साल के लिए निष्कासित करने का फैसला लिया है।

राजद ने जदयू में गुटबाजी का लगाया आरोप

राजद प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि जदयू ने अनंत सिंह पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष की ओर से निष्कासन का आदेश जारी किया गया है और अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को भी पार्टी से निष्कासित किए जाने की बात सामने आई है। शक्ति सिंह यादव ने जदयू के भीतर गुटबाजी का आरोप लगाते हुए दावा किया कि पार्टी कई गुटों में बंटी हुई है और इस तरह की घटनाओं से संगठन कमजोर होगा। उन्होंने ललन सिंह के पटना पहुंचने और पत्रकारों के सवालों का जवाब नहीं देने के घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। राजद प्रवक्ता ने निष्कासन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी मौजूदा विधायक के खिलाफ ऐसी कार्रवाई करने का अधिकार किस स्तर पर है, यह स्पष्ट होना चाहिए। हालांकि, ये आरोप राजद की ओर से लगाए गए हैं।

जदयू ने कार्रवाई को बताया अनुशासन का मामला

जदयू प्रवक्ता चंदन सिंह ने पार्टी के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि जदयू अनुशासन को महत्व देने वाली पार्टी है। उनके मुताबिक, नीरज कुमार पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार थे, जबकि अनंत सिंह लगातार पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे। पार्टी नेतृत्व ने पूरे मामले पर विचार करने के बाद कार्रवाई का निर्णय लिया। चंदन सिंह ने कहा कि पार्टी या गठबंधन के खिलाफ गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि अनंत सिंह को अपनी गतिविधियों में सुधार करने का अवसर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद पार्टी विरोधी गतिविधियां जारी रहीं। उनके अनुसार, इसी वजह से नेतृत्व ने उन्हें पार्टी से बाहर करने का फैसला लिया। उन्होंने नीतीश कुमार के नेतृत्व में वर्ष 2005 के बाद बिहार में हुए विकास कार्यों का भी उल्लेख किया और कहा कि पार्टी अपने अनुशासन तथा गठबंधन की प्रतिबद्धताओं से समझौता नहीं करेगी।

पूर्व एमएलसी वाल्मीकि सिंह ने उठाए सवाल

पूर्व विधान पार्षद वाल्मीकि सिंह ने अनंत सिंह के निष्कासन को गलत बताते हुए पार्टी के कुछ नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जारी किया गया निष्कासन पत्र उचित नहीं है। वाल्मीकि सिंह के मुताबिक, अनंत सिंह पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सम्मान करते हैं और पार्टी को आगे बढ़ाने की बात करते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जदयू में कुछ नेता नीतीश कुमार के बाद पार्टी के नेतृत्व को लेकर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते हैं और उनके समर्थक नेताओं को किनारे करने की कोशिश कर रहे हैं। वाल्मीकि सिंह ने अनंत सिंह का बचाव करते हुए कहा कि पार्टी से निष्कासन का अर्थ यह नहीं है कि जनता ने भी उन्हें नकार दिया है।

बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल

अनंत सिंह के निष्कासन के बाद जदयू के भीतर अनुशासन और संगठनात्मक अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर पार्टी नेतृत्व इस कदम को पार्टी विरोधी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है, वहीं विपक्ष और कुछ अन्य नेताओं ने इसके पीछे गुटबाजी होने के आरोप लगाए हैं। फिलहाल, इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।