लखीसराय में ‘वैली ऑफ हर्बल गार्डन’ की शुरुआत, 20 दुर्लभ औषधीय पौधों का हुआ रोपण

  • Post By Admin on Aug 16 2026
लखीसराय में ‘वैली ऑफ हर्बल गार्डन’ की शुरुआत, 20 दुर्लभ औषधीय पौधों का हुआ रोपण

लखीसराय : चानन प्रखंड की भलुई पंचायत के महाजन्मा जनजातीय गांव में पहाड़ी क्षेत्र को ‘वैली ऑफ हर्बल गार्डन’ के रूप में विकसित करने की पहल शुरू की गई है। जिला प्रशासन, कृषि विभाग के उद्यान निदेशालय और बिहार कृषि विश्वविद्यालय के संयुक्त प्रयास से इस प्राकृतिक वैली में दुर्लभ औषधीय पौधों का रोपण कर परियोजना का शुभारंभ किया गया।

इस दौरान जिला पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता, जिला उद्यान पदाधिकारी समेत अन्य अधिकारियों ने जनजातीय ग्रामीणों और प्रगतिशील किसानों के साथ 20 प्रकार के हर्बल एवं मेडिसिनल पौधे लगाए। इसके अलावा कालमेघ और तुलसी के बीजों की खुले खेत में बुआई भी की गई।

20 प्रकार के औषधीय पौधों का रोपण

हर्बल गार्डन के तहत वच, अजवाइन, काली हल्दी, कोलियस, हथजोड़, तीतराज, शतावर, काली मूसली, पत्थरचूड़, अश्वगंधा, एलोवेरा, गुग्गुल, अनंतमूल, दमबेल, सेंट्रीनोला, लेमनग्रास, सिंधुवार, पीपली और कालमेघ सहित 20 प्रकार के पौधों का चयन किया गया है। प्रत्येक प्रजाति के पांच-पांच पौधों के बेड तैयार कर ग्रामीणों की सहभागिता से उनका रोपण किया गया।

किसानों को कैश क्रॉप की ओर बढ़ाने की पहल

जिला पदाधिकारी ने कहा कि इन दुर्लभ औषधीय पौधों की खेती किसानों को धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर कैश क्रॉप की दिशा में ले जाने की महत्वपूर्ण पहल है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा और क्षेत्र में औषधीय खेती को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने आगे उद्यानिक व्यवसाय एवं प्रोसेसिंग यूनिट, कृषि यंत्र, डिस्टिलेशन सेंटर और वाहनों के लिए अनुदान की व्यवस्था करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इससे क्षेत्र में उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण और विपणन की संभावनाएं भी विकसित हो सकेंगी।

ग्रामीणों को योजनाओं से जोड़ने पर जोर

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को औषधीय पौधों के महत्व और उनकी खेती से होने वाले लाभों की जानकारी दी गई। किसानों को कृषि विभाग की डीबीटी साइट पर पंजीकरण कराने और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया। कृषि यंत्रों के वितरण एवं पंजीकरण के लिए अलग से शिविर लगाने का भी निर्देश दिया गया।

जिला प्रशासन की ओर से बताया गया कि इस क्षेत्र का पूर्व में भी निरीक्षण किया गया था। पहाड़ी क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और कृषि की संभावनाओं को देखते हुए कृषि एवं उद्यान वैज्ञानिकों ने इसे हर्बल मेडिसिनल गार्डन के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की थी। इसी क्रम में बिहार कृषि विश्वविद्यालय से प्राप्त दुर्लभ पौधों और बीजों का रोपण कर परियोजना की शुरुआत की गई।

इस अवसर पर अधिकारियों ने क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों द्वारा नई कृषि पद्धतियों को अपनाने की सराहना की। जिला उद्यान पदाधिकारी राजीव रंजन के प्रयासों की भी प्रशंसा की गई। कार्यक्रम में जिला प्रशासन के अधिकारियों, कृषि एवं उद्यान विभाग के पदाधिकारियों तथा महाजन्मा गांव के प्रगतिशील किसानों सहित संबंधित कर्मियों की उपस्थिति रही।