बिहार में 51,600 करोड़ रुपए के निवेश पर मुहर, स्टील और टेक्सटाइल सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा

  • Post By Admin on Aug 07 2026
बिहार में 51,600 करोड़ रुपए के निवेश पर मुहर, स्टील और टेक्सटाइल सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा

पटना : बिहार में औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में शुक्रवार को बड़ा कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की उपस्थिति में उद्योग विभाग और विभिन्न औद्योगिक समूहों के बीच लगभग 51,600 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह निवेश इस्पात, कपड़ा, क्लीन एवं परमाणु ऊर्जा, फूड प्रोसेसिंग और फार्मा जैसे क्षेत्रों में प्रस्तावित है।

लोकसेवक आवास में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार को देश के प्रमुख स्टील हब के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश से राज्य में रोजगार, उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होगा तथा विकसित बिहार के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में स्टील और मेटल आधारित उद्योगों के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र में बड़ी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों स्तरों पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिसका सबसे अधिक लाभ राज्य के युवाओं को मिलेगा। समारोह में यह भी बताया गया कि कपड़ा उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण और फार्मास्युटिकल क्षेत्र में प्रस्तावित निवेश से औद्योगिक आधार मजबूत होगा और स्थानीय स्तर पर उत्पादन तथा मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से राज्य की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ मिशन मोड में काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि एमओयू केवल निवेश प्रस्तावों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनसे जुड़ी परियोजनाओं को शीघ्र धरातल पर उतारना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से निवेशकों को हर संभव सुविधा और सहयोग उपलब्ध कराने को कहा, ताकि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की प्रशासनिक बाधा न आए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उद्योगों की स्थापना के लिए आवश्यक स्वीकृतियों और प्रक्रियाओं को तेज किया जाएगा।

सरकार के अनुसार, प्रस्तावित निवेश से बिहार में औद्योगिक गतिविधियों को नया आधार मिलेगा और राज्य को पूर्वी भारत के उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये परियोजनाएं तय समयसीमा में लागू होती हैं, तो बिहार में रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को महत्वपूर्ण गति मिल सकती है।