कवि असलम हसन की कृति पोटली में चाँद का भव्य विमोचन, साहित्यकारों ने सराही अभिव्यक्ति
- Post By Admin on Apr 01 2026
पटना: जिले में साहित्यिक सरोकारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण आयोजन उस समय देखने को मिला, जब समकालीन कविता की नई संवेदनाओं को स्वर देने वाली कृति “पोटली में चाँद” का भव्य लोकार्पण हुआ। 31 मार्च को बापू टावर स्थित सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम ने साहित्यिक विमर्श, विचार और संवाद का एक सशक्त मंच प्रदान किया, जहाँ देश के कई प्रमुख साहित्यकार एकत्रित हुए।
कवि असलम हसन की इस बहुप्रतीक्षित कविता पुस्तक के लोकार्पण समारोह का आयोजन ‘समन्वय’ संस्था के तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ कवियों आलोक धन्वा, अरुण कमल और डॉ. विनय कुमार के विचारपूर्ण वक्तव्यों से हुई, जिन्होंने इस कृति को समकालीन हिंदी कविता में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप बताया। आलोक धन्वा ने अपने संबोधन में कहा कि असलम हसन की कविताएँ अपने समय की बेचैनी, संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं को बेहद सहज और प्रभावी ढंग से व्यक्त करती हैं। उन्होंने कहा कि यह संग्रह वर्तमान सामाजिक परिदृश्य को समझने का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बन सकता है। वहीं, अरुण कमल ने कवि की भाषा और शिल्प पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी कविताओं में सादगी और गहराई का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है, जो पाठकों को सीधे जोड़ता है।
डॉ. विनय कुमार ने इस कृति को समकालीन कविता में एक सशक्त हस्तक्षेप बताते हुए कहा कि इसमें आम आदमी की पीड़ा, संघर्ष और उम्मीदें पूरी जीवंतता के साथ सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि यह संग्रह न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक चेतना को भी जागृत करता है। कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखते हुए पुस्तक की विशेषताओं को रेखांकित किया। कृष्ण समिद्ध ने कहा कि असलम हसन की कविता की भाषा पारदर्शी है और उसमें विचारों की अनावश्यक जटिलता नहीं है, जो इसे व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने में सक्षम बनाती है। कवि अंचित ने कहा कि इस संग्रह में समकालीन कविता की लगभग सभी प्रमुख विशेषताएँ विद्यमान हैं। प्रत्युष चंद्र मिश्रा ने अपनी टिप्पणी में कहा कि ये कविताएँ आम आदमी की भाषा में आम आदमी की ही बात करती हैं, जिससे पाठक खुद को इससे जुड़ा हुआ महसूस करता है। अनीश अंकुर ने कहा कि आज के समय की मानसिकता और सामाजिक परिस्थितियों का सटीक प्रतिबिंब इन कविताओं में देखने को मिलता है।
सफदर इमाम कादरी ने कहा कि असलम हसन ऐसे कवि हैं, जो अपने समय और समाज से गहरे रूप से जुड़े हुए हैं। उनकी कविताओं में वर्तमान समय की धड़कन साफ-साफ सुनाई देती है। वहीं, संजय कुमार कुंदन ने कहा कि एक अच्छा इंसान ही संवेदनशील कविता लिख सकता है और असलम हसन की मानवीय संवेदनशीलता उनकी रचनाओं में स्पष्ट रूप से झलकती है। कार्यक्रम का संचालन सुशील कुमार ने कुशलता पूर्वक किया, जिससे पूरा आयोजन व्यवस्थित और प्रभावशाली बना रहा। इस अवसर पर कई प्रमुख साहित्यकार और अतिथि उपस्थित रहे, जिनमें कुमार मुकुल, शहंशाह आलम, सुनील कुमार, सफदर इमाम, मनीष महिवाल, कादरी, अनिल विभाकर, राजेश कलम और चंद्रबिंद सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी शामिल हुए।
कुल मिलाकर “पोटली में चाँद” का यह लोकार्पण समारोह न केवल एक पुस्तक विमोचन तक सीमित रहा, बल्कि यह समकालीन हिंदी कविता की दिशा, उसकी संवेदनाओं और समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारी पर गंभीर विचार-विमर्श का मंच भी बना। यह आयोजन इस बात का संकेत है कि साहित्य आज भी समाज के भीतर संवाद और परिवर्तन की एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में सक्रिय है।