नदियों के बढ़ते जलस्तर से सहमा बिहार, सोन में उफान और गंगा ने मचाई तबाही

  • Post By Admin on Sep 02 2026
नदियों के बढ़ते जलस्तर से सहमा बिहार, सोन में उफान और गंगा ने मचाई तबाही

पटना : बिहार में लगातार बढ़ते नदी के जलस्तर ने बाढ़ की चिंता और गहरा दी है। गंगा और गंडक के बाद अब सोन नदी भी उफान पर है। मंगलवार को सोन में जलप्रवाह करीब 5.25 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया, जो इस साल का अब तक का सर्वाधिक स्तर बताया जा रहा है। बढ़ते दबाव को देखते हुए इंद्रपुरी बराज के 69 में से 56 गेट खोल दिए गए हैं। राज्य की कई नदियां पहले से ही खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं, जिससे दक्षिण और पूर्वी बिहार के निचले इलाकों में पानी फैलने लगा है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी मोतिहारी में एक कार्यक्रम के दौरान राज्य में बनी बाढ़ की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गंडक, कोसी, बागमती और गंगा के जलस्तर में वृद्धि हुई है और इससे कई क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार बाढ़ और जल प्रबंधन को लेकर लगातार काम कर रही है तथा प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश प्रशासन को दिए गए हैं।

राघोपुर में गंगा का भीषण कटाव, रेलवे लाइन पर मंडराया खतरा

भागलपुर के नवगछिया क्षेत्र के राघोपुर में गंगा का कटाव बेहद गंभीर हो गया है। राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध के सी-नोज के पास मंगलवार सुबह अचानक तेज कटाव शुरू हुआ। कुछ ही समय में तटबंध का 100 मीटर से अधिक हिस्सा गंगा में समा गया। नदी के तेज कटाव की चपेट में रेलवे लाइन के किनारे स्थित मां चैती दुर्गा मंदिर और बाबा बजरंगबली मंदिर भी आ गए और दोनों नदी में विलीन हो गए। अब तक तटबंध करीब 350 मीटर लंबाई में क्षतिग्रस्त हो चुका है। पुरानी रेलवे लाइन की ओर लगभग 100 मीटर तटबंध ही बचा है। गंगा का पानी अब सीधे रेलवे लाइन से टकरा रहा है, जिससे रेल मार्ग की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा हो गई है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह नई दिल्ली में चल रही बैठक को बीच में छोड़कर पटना लौटे। इसके बाद जल संसाधन सचिव भागलपुर पहुंचे और तटबंध की सुरक्षा के लिए चल रहे कार्यों का जायजा लिया। अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बांध की सुरक्षा और कटाव रोकने के लिए हर जरूरी और संभावित उपाय किए जा रहे हैं। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

बाणसागर से छोड़ा गया पानी सोन में पहुंचा

सोन नदी में अचानक बढ़े जलप्रवाह की एक प्रमुख वजह बाणसागर बांध से छोड़ा गया पानी भी है। रविवार को बाणसागर से छोड़ा गया पानी मंगलवार को सोन नदी में पहुंचा, जिसके बाद नदी किनारे बसे गांवों पर खतरा बढ़ गया। मनेर में भी सोन खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जलस्तर बढ़ने से आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

गंडक और कोसी का जलस्तर भी चिंताजनक

जल संसाधन विभाग के अनुसार नेपाल में बाढ़ के बाद गंडक नदी के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। मंगलवार को वाल्मीकिनगर बराज से करीब 1.25 लाख से 1.50 लाख क्यूसेक के बीच पानी छोड़ा गया। डुमरियाघाट में गंडक खतरे के निशान से 56 सेंटीमीटर और बंगराघाट में 24 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।

कोसी नदी भी बलतारा में खतरे के निशान से 1.11 मीटर और कुरसेला में 41 सेंटीमीटर ऊपर है। खगड़िया में बूढ़ी गंडक का जलस्तर भी खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया है।

गंगा कई स्थानों पर लाल निशान के ऊपर

गंगा का जलस्तर भी कई इलाकों में खतरे के निशान को पार कर गया है। दीघा, गांधी घाट, हाथीदह और कहलगांव में नदी लाल निशान के ऊपर बह रही है। पश्चिम चंपारण में गंडक का कटाव तेज हुआ है, जबकि मधुबनी की चिऊरही पंचायत के रेवहिया और योगापट्टी में भी नदी किनारे कटाव जारी है।

मांझरकुंड जलप्रपात में पर्यटकों की आवाजाही पर रोक

लगातार बारिश के कारण रोहतास के मांझरकुंड जलप्रपात का जलप्रवाह भी काफी बढ़ गया है। पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने अगले आदेश तक जलप्रपात में प्रवेश पर रोक लगा दी है। प्रशासन ने लोगों से सुरक्षा व्यवस्था का पालन करने और प्रतिबंधित क्षेत्र में नहीं जाने की अपील की है।