बिहार में छात्र कल्याण निदेशालय बनेगा, शिक्षा और परीक्षा सुधार के लिए दो राज्यस्तरीय कमेटियां गठित

  • Post By Admin on Aug 10 2026
बिहार में छात्र कल्याण निदेशालय बनेगा, शिक्षा और परीक्षा सुधार के लिए दो राज्यस्तरीय कमेटियां गठित

पटना: बिहार सरकार ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने छात्र कल्याण से जुड़े कार्यों के बेहतर संचालन और समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए एक अलग छात्र कल्याण निदेशालय गठित करने की घोषणा की है।

रविवार को पटना स्थित अधिवेशन भवन में शिक्षा अधिकारियों के दो दिवसीय कार्यशाला-सह-चिंतन शिविर के उद्घाटन के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा, उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रावैधिकी तथा युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग मिलकर इस नए निदेशालय का गठन करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों से जुड़े कार्यों में समन्वय बढ़ेगा और शिक्षा एवं परीक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा और परीक्षा सुधार के लिए दो राज्यस्तरीय कमेटियों के गठन की भी घोषणा की। पहली कमेटी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने पर काम करेगी, ताकि राज्य के प्रत्येक विद्यालय को उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके और छात्रों के सीखने के स्तर में लगातार सुधार हो। दूसरी कमेटी परीक्षा सुधार से संबंधित होगी, जो परीक्षाओं को सुचारू, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए सुझाव देगी। उन्होंने बताया कि यह समिति बोर्ड परीक्षाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं और कक्षा आधारित मूल्यांकन में तकनीक तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग के माध्यम से छात्रों के ज्ञान, समझ और विश्लेषण क्षमता के बेहतर आकलन की दिशा में कार्य करेगी।

सम्राट चौधरी ने युवाओं को बिहार का भविष्य बताते हुए कहा कि उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करना चाहती है, जिससे बिहार के बच्चों को बेहतर पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक रूप से सक्षम परिवार अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, लेकिन संसाधनों की कमी से जूझ रहे परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत लगभग 18 हजार करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं और इसका बड़ा हिस्सा दूसरे राज्यों में शिक्षा पर खर्च हो रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि कोटा जैसे शहरों में बड़ी संख्या में बिहार के छात्र पढ़ने जाते हैं, जबकि वहां पढ़ाने वाले कई शिक्षक भी बिहार के ही हैं। सरकार का प्रयास है कि राज्य में ऐसी शैक्षणिक व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा बिहार में ही उपलब्ध हो सके। कार्यशाला में शिक्षा विभाग के 322 अधिकारी भाग ले रहे हैं, जहां शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली और छात्र कल्याण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत मंथन किया जा रहा है।