बंगाल में सियासी संग्राम : सड़क पर ममता का शक्ति प्रदर्शन, हंगामे के बीच जज ने छोड़ी सुनवाई

  • Post By Admin on Jan 10 2026
बंगाल में सियासी संग्राम : सड़क पर ममता का शक्ति प्रदर्शन, हंगामे के बीच जज ने छोड़ी सुनवाई

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के बाद केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच सियासी टकराव खुलकर सामने आ गया है। कोयला घोटाले और हवाला रैकेट की जांच के सिलसिले में ईडी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के चुनावी प्रबंधन से जुड़ी राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म ‘आईपीएसी’ के ठिकानों पर रेड की, जिसके बाद मामला और अधिक गरमा गया।

छापेमारी की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद भारी सुरक्षा बल के साथ मौके पर पहुंच गईं। ईडी का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया और दोनों ठिकानों से कुछ महत्वपूर्ण फाइलें व इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अपने साथ ले गईं, जिनमें कथित तौर पर घोटाले से जुड़े अहम साक्ष्य हो सकते थे। ईडी ने इसे जांच को प्रभावित करने का प्रयास बताया है।

इस कार्रवाई के विरोध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में एक विशाल रैली निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। रैली का नेतृत्व स्वयं मुख्यमंत्री ने किया। उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर उनकी सरकार और पार्टी को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। ममता बनर्जी ने कहा कि भ्रष्टाचार के नाम पर उनके चुनावी अभियान को बाधित करने की कोशिश की जा रही है।

मामला जब कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचा तो वहां भी हालात असामान्य हो गए। सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में भारी भीड़ उमड़ पड़ी और वकीलों व पक्षकारों के बीच जमकर हंगामा हुआ। शोर-शराबे के कारण कार्यवाही बाधित होती रही, जिससे न्यायालय का वातावरण तनावपूर्ण हो गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि जस्टिस सुव्रा घोष को बीच में ही अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे माहौल में निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है। वीकेंड अवकाश के कारण अब मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी।

विवाद के केंद्र में राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म आईपीएसी और उसके प्रमुख प्रतीक जैन हैं। यह फर्म टीएमसी के लिए आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार कर रही है। ईडी का दावा है कि आईपीएसी को हवाला के जरिए धनराशि प्राप्त हुई है, इसी संदेह के आधार पर छापेमारी की गई। दूसरी ओर, टीएमसी का आरोप है कि ईडी जांच के बहाने उनकी चुनावी रणनीतियों, उम्मीदवारों की सूची और आंतरिक दस्तावेज हासिल करना चाहती है।

इस बीच ईडी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर लगाए गए आरोपों की जांच सीबीआई से कराने की मांग भी की है, जिससे यह सियासी और कानूनी टकराव और गहरा होता दिख रहा है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह मामला आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।