बिहार कैबिनेट में अनुभवी चेहरों की एंट्री, इंजीनियर से लेकर सियासत के दिग्गजों तक को मिली जिम्मेदारी

  • Post By Admin on May 07 2026
बिहार कैबिनेट में अनुभवी चेहरों की एंट्री, इंजीनियर से लेकर सियासत के दिग्गजों तक को मिली जिम्मेदारी

पटना : बिहार में सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल के बड़े विस्तार के बाद सरकार में कई अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं को जगह मिली है। नए मंत्रिमंडल में ऐसे चेहरे शामिल हैं जिन्होंने संगठन, चुनावी राजनीति और प्रशासनिक अनुभव के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है। इनमें भाजपा और जेडीयू के कई वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बिहपुर से लगातार तीसरी जीत के बाद मंत्री बने कुमार शैलेंद्र

भागलपुर जिले के बिहपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक कुमार शैलेंद्र पहली बार मंत्री बनाए गए हैं। साठ वर्षीय कुमार शैलेंद्र पेशे से सिविल इंजीनियर हैं और क्षेत्र में मजबूत जनाधार वाले नेता माने जाते हैं। उन्होंने वर्ष 1991 में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। कुमार शैलेंद्र ने बिहार के चुनावी इतिहास में बिहपुर सीट से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर नया रिकॉर्ड कायम किया है। वे 2020 के बाद 2025 विधानसभा चुनाव में भी जीतकर विधायक बने। भाजपा संगठन में उनकी पहचान जमीनी और सक्रिय नेता की रही है। विकास कार्यों और संगठनात्मक पकड़ के कारण वे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं।

विजय सिन्हा ने बनाई सख्त प्रशासक की छवि

लखीसराय से भाजपा विधायक विजय कुमार सिन्हा बिहार राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। 2025 विधानसभा चुनाव के बाद बनी एनडीए सरकार में उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया था। साथ ही उन्हें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की जिम्मेदारी भी दी गई थी। विजय सिन्हा ने अपने विभाग में कई सख्त फैसले लेकर ईमानदार और कड़े प्रशासक की छवि बनाई। इससे पहले वे बिहार विधानसभा अध्यक्ष भी रह चुके हैं। गठबंधन टूटने के बाद उन्हें यह पद छोड़ना पड़ा था, लेकिन 2024 और 2025 में एनडीए सरकार बनने के बाद वे फिर उपमुख्यमंत्री बने। वे वर्ष 2010 से लगातार लखीसराय सीट से विधायक चुने जा रहे हैं। उन्होंने बेगूसराय के पॉलिटेक्निक कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से उनका जुड़ाव 1982 से रहा है, जिसने उनके राजनीतिक जीवन को मजबूत आधार दिया।

रामकृपाल यादव का लंबा राजनीतिक अनुभव

रामकृपाल यादव बिहार की राजनीति के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। छात्र राजनीति से अपने करियर की शुरुआत करने वाले रामकृपाल यादव लंबे समय तक राष्ट्रीय जनता दल और लालू प्रसाद यादव के करीबी सहयोगी रहे। वर्ष 1992 में वे पहली बार विधान परिषद सदस्य बने और 1993 में पहली बार लोकसभा पहुंचे। 2014 में टिकट विवाद के बाद उन्होंने राजद छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया। उसी वर्ष उन्होंने पटना साहिब सीट से मीसा भारती को हराकर बड़ी राजनीतिक जीत हासिल की थी। वे 2014 से 2019 तक केंद्र सरकार में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री भी रहे। 2025 में उन्होंने पहली बार दानापुर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बनने का नया अध्याय शुरू किया।

बुलो मंडल ने बदली राजनीतिक पारी

गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र से जदयू विधायक शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल भी बिहार की राजनीति का चर्चित चेहरा हैं। वे वर्ष 2000, 2005 और 2010 में राजद के टिकट पर विधायक चुने गए थे। इसके बाद 2014 से 2019 तक सांसद भी रहे। बाद में उन्होंने जदयू का दामन थामा और गोपालपुर क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी। पिछड़े वर्गों और ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी अच्छी राजनीतिक पकड़ मानी जाती है। नए मंत्रिमंडल में उन्हें शामिल किए जाने को जदयू के सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।