हठ पर अड़े हनुमान जी ! उज्जैन में नहीं हिली हनुमान प्रतिमा, भक्त बोले- यह प्रभु की लीला है

  • Post By Admin on Sep 09 2026
हठ पर अड़े हनुमान जी ! उज्जैन में नहीं हिली हनुमान प्रतिमा, भक्त बोले- यह प्रभु की लीला है

उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियों के बीच एक ऐसा दृश्य सामने आया है, जिसने विकास कार्यों के साथ आस्था की चर्चा को भी गहरा कर दिया है। कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण के लिए करीब 170 वर्ष पुराने खड़े हनुमान मंदिर का भवन तो हटा दिया गया, लेकिन मंदिर में विराजमान हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने की तमाम तकनीकी कोशिशें सफल नहीं हो सकीं।

आधुनिक मशीनें लगीं, इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ बुलाए गए, प्रतिमा के आधार की जांच के लिए करीब डेढ़ फीट तक खुदाई की गई, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। दो दिनों तक विशेषज्ञों ने प्रतिमा के आधार और आसपास की संरचना को समझकर उसे सुरक्षित तरीके से हटाने का प्रयास किया, मगर कोई रास्ता नहीं निकला। जहां तकनीकी विशेषज्ञ इसे संरचनात्मक चुनौती मान रहे हैं, वहीं श्रद्धालुओं की आंखों में इसे लेकर अलग ही भाव दिखाई दे रहा है। भक्तों का कहना है कि जब प्रभु को अपनी जगह से हटाने की हर कोशिश नाकाम हो रही है, तो इसे महज संयोग कैसे माना जाए। उनके लिए यह बजरंगबली की इच्छा और प्रभु की लीला है। मंगलवार शाम मंदिर परिसर में सैकड़ों श्रद्धालु जुटे। महाआरती हुई, ढोल-ताशे बजे और हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। वातावरण में भक्ति का ऐसा रंग दिखाई दिया कि सड़क चौड़ीकरण का मुद्दा कुछ देर के लिए पीछे छूट गया और पूरा परिसर जय बजरंगबली के जयकारों से गूंज उठा।

इसी बीच सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो ने लोगों का ध्यान और खींच लिया। वीडियो में मध्य प्रदेश पुलिस के जवान और अधिकारी बैंड-बाजे के साथ हनुमान जी को मनाने पहुंचे दिखाई दे रहे हैं। इसे देखकर भक्तों के बीच यह चर्चा होने लगी कि जब प्रशासन की मशीनें और तकनीक प्रतिमा को नहीं हिला सकीं, तो अब शायद प्रभु को मनाने के लिए भक्ति और संगीत का सहारा लिया जा रहा है। श्रद्धालुओं का साफ कहना है जब बजरंगबली स्वयं अपनी जगह से नहीं हिल रहे हैं, तो उन्हें हटाने की कोशिश क्यों की जाए? सड़क चौड़ीकरण जरूरी है, लेकिन विकास के साथ आस्था का सम्मान भी उतना ही जरूरी है।

मंदिर के पुजारी सुलभ शांतनु शर्मा और मंदिर समिति ने भी प्रतिमा को हटाने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मंदिर के दोनों ओर सड़क मौजूद है, इसलिए प्रशासन को सड़क की योजना पर पुनर्विचार करना चाहिए। यदि प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने का निर्णय होता है तो पहले लिखित गारंटी दी जाए कि प्रतिमा को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचेगा और उसे सुरक्षित रूप से टंकी चौक पर स्थापित किया जाएगा। प्रशासन की ओर से भी फिलहाल जल्दबाजी में कदम उठाने के बजाय विशेषज्ञों की राय के आधार पर आगे की तकनीक तय करने की तैयारी है। प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए फिलहाल टेंट लगाया गया है। लेकिन भक्तों के लिए सवाल तकनीक का नहीं, विश्वास का है। उनका कहना है कि भगवान को हटाने के लिए इंसानी ताकत जितनी बार लगाई गई, हर बार प्रभु अपनी जगह अडिग खड़े रहे। यही अडिगता अब उनके लिए संदेश बन गई है। आस्था कहती है-जिसे दुनिया की ताकत नहीं हिला सकी, शायद उसे हिलाने का अधिकार भी किसी को नहीं। हनुमान जी को मनाने पहुंचे पुलिसकर्मी हों या प्रतिमा के सामने गूंजती हनुमान चालीसा, उज्जैन का यह दृश्य अब विकास और आस्था के बीच संतुलन की एक बड़ी तस्वीर बन गया है।