बाघों के जंगल में गजराजों का बसेरा, लगातार बढ़ रहा हाथियों का कुनबा

  • Post By Admin on Aug 17 2026
बाघों के जंगल में गजराजों का बसेरा, लगातार बढ़ रहा हाथियों का कुनबा

मध्यप्रदेश : बाघों के लिए दुनियाभर में पहचान रखने वाला बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अब जंगली हाथियों के लिए भी तेजी से अनुकूल ठिकाना बनता जा रहा है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और आसपास के लैंडस्केप में करीब 50 से 70 जंगली हाथियों की मौजूदगी का अनुमान है। वहीं, शहडोल जिले के पश्चिमी ब्यौहारी क्षेत्र में भी करीब 25 हाथियों का एक दल पिछले लगभग डेढ़ साल से लगातार मौजूद है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय के अनुसार, बांधवगढ़ में हाथियों की नियमित मौजूदगी पहली बार अक्टूबर 2018 में दर्ज की गई थी। उस समय हाथी संजय गांधी टाइगर रिजर्व से कॉरिडोर के जरिए बांधवगढ़ पहुंचे थे। इसके बाद हाथियों का आवागमन खेतौली, पनपथा कोर, ताला और कल्लवाह तक फैल गया। वन विभाग के मुताबिक हाथी किसी एक स्थान पर स्थायी रूप से नहीं रहते। भोजन, पानी और सुरक्षा की उपलब्धता के अनुसार वे लगातार अपना रास्ता और क्षेत्र बदलते रहते हैं। इसी कारण किसी एक रेंज में उनकी स्थायी संख्या निर्धारित करना मुश्किल होता है। वन विभाग उनकी गतिविधियों और आवाजाही पर लगातार निगरानी रख रहा है।

बांधवगढ़ के विस्तृत जंगल, बांस के क्षेत्र, साल और मिश्रित वन हाथियों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध करा रहे हैं। हाथियों की बढ़ती मौजूदगी से वन्यजीव पर्यटन को भी नया आकर्षण मिला है। पर्यटक जंगल में हाथियों के झुंड, बच्चों के साथ चलते हाथियों और उनके सामाजिक व्यवहार को देखकर रोमांचित हो रहे हैं। हालांकि, हाथियों की बढ़ती संख्या के साथ मानव-हाथी संघर्ष की चुनौती भी सामने है। वन विभाग का जोर हाथियों और इंसानी आबादी के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने पर है। निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए गजरक्षक ऐप, एलीफेंट कंट्रोल रूम, रेडियो कॉलरिंग और वैज्ञानिक पहचान पद्धति का इस्तेमाल किया जा रहा है। हाथियों की पहचान उनके कानों की बनावट, शरीर के दाग-धब्बों, दांत और पूंछ जैसी विशेषताओं के आधार पर की जा रही है। इसके साथ ही फ्रंटलाइन स्टाफ को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि हाथियों की गतिविधि का अलर्ट मिलने पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।

शहडोल उत्तर वनमंडल की डीएफओ तरुणा वर्मा के मुताबिक, ब्यौहारी क्षेत्र में भी हाथियों के लगातार ठहरने के पीछे प्राकृतिक परिस्थितियां अहम हैं। बाणसागर के बैकवाटर, कम मानव बस्तियां और पर्याप्त बांस के जंगल हाथियों के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण उपलब्ध करा रहे हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान और प्रोजेक्ट एलीफेंट की रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश में फिलहाल 97 जंगली हाथी दर्ज किए गए हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मध्यप्रदेश हाथियों के लिए स्थायी आवास के रूप में कितना विकसित होता है और वन विभाग मानव-हाथी संघर्ष को रोकने में कितनी प्रभावी रणनीति अपनाता है।