1 अप्रैल से बढ़ेंगी जरूरी दवाओं की कीमतें, 1000 से अधिक दवाएं होंगी महंगी
- Post By Admin on Mar 26 2026
नई दिल्ली : देश में आम लोगों को 1 अप्रैल 2026 से दवाओं की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है। सरकार ने आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची में शामिल 1000 से अधिक दवाओं की कीमतों में लगभग 0.6 प्रतिशत तक वृद्धि की अनुमति दी है।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (National Pharmaceutical Pricing Authority) के अनुसार यह निर्णय थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर लिया गया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में थोक मूल्य सूचकांक में 2024 की तुलना में 0.64956 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके आधार पर दवाओं की कीमतों में संशोधन किया गया है।
बताया गया है कि सूचीबद्ध आवश्यक दवाओं में बुखार, दर्द, संक्रमण और एनीमिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। इनमें Paracetamol, Azithromycin जैसी एंटीबायोटिक्स, विटामिन और मिनरल सप्लीमेंट्स के साथ-साथ कोविड-19 के मध्यम और गंभीर मामलों में उपयोग की जाने वाली कुछ दवाएं और स्टेरॉयड भी शामिल हैं।
गौरतलब है कि नियंत्रित दवाओं की कीमतों में बदलाव की अनुमति साल में एक बार दी जाती है। इस बार कीमतों में यह मामूली बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है, जब दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की लागत में लगातार वृद्धि हो रही है।
फार्मा उद्योग के विशेषज्ञों के अनुसार हाल के समय में एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (एपीआई) और सॉल्वैंट्स की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक एपीआई की कीमतों में औसतन 30 से 35 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं ग्लिसरीन की कीमत करीब 64 प्रतिशत बढ़ गई है, जबकि Paracetamol लगभग 25 प्रतिशत और Ciprofloxacin करीब 30 प्रतिशत महंगी हो चुकी है।
इसके अलावा दवाओं की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जैसे पीवीसी और एल्युमीनियम फॉयल की कीमतों में भी लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। फार्मा उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि कच्चे माल और इंटरमीडिएट्स की बढ़ती लागत को देखते हुए मौजूदा बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है और इस संबंध में प्राधिकरण के समक्ष अपनी बात रखी जाएगी।