सबरीमाला सोना चोरी मामले में खुलासा : दरवाजे सुरक्षित, सोने की परत ही गायब
- Post By Admin on Jan 29 2026
तिरुवनंतपुरम : सबरीमाला मंदिर में हुए सोना चोरी मामले में इसरो की नई वैज्ञानिक जांच ने कई अटकलों और शंकाओं पर विराम लगा दिया है। विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के वैज्ञानिकों ने परीक्षणों में पुष्टि की है कि गर्भगृह (संनिधानम) के दरवाजे के पैनल बदले नहीं गए थे। चोरी केवल तांबे की चादरों पर चढ़ी सोने की परत को रासायनिक प्रक्रिया के जरिए हटाकर की गई थी, न कि ठोस सोने वाले पैनलों को बदलकर।
यह निष्कर्ष विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपे गए हैं और इसे बुधवार को केरल हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया गया। इस जांच से यह स्पष्ट हो गया कि गर्भगृह के ढांचे को पूरी तरह बदलने या अंतरराष्ट्रीय गिरोहों से जोड़ने जैसी खबरें सही नहीं थीं।
वैज्ञानिकों ने बताया कि सबरीमाला के दरवाजों के पैनल मूल तांबे की चादरें ही हैं। जांच में यह भी सामने आया कि चोरी किए गए हिस्से में ठोस सोना नहीं था, बल्कि तांबे पर चढ़ी सोने की परत थी। दरवाजों का लकड़ी का ढांचा (‘कट्टिल’) भी पूरी तरह मूल ही पाया गया। हालांकि, जिन चादरों को हटाकर दोबारा लगाया गया था, उनमें सोने की परत में स्पष्ट कमी देखी गई। इससे यह साबित होता है कि तांबे को नुकसान पहुंचाए बिना सोने की परत अलग की गई।
पैनलों पर दिखाई देने वाले रंग और बनावट के बदलावों को लेकर उठी शंकाओं पर वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि ये रासायनिक प्रतिक्रियाओं के कारण हैं, न कि पैनल बदलने के कारण। सोना निकालने में पारा (मरकरी) और अन्य रासायनिक घोलों का इस्तेमाल किया गया, जिससे सतह की रासायनिक संरचना प्रभावित हुई और रंग और बनावट में फर्क नजर आया।
एसआईटी ने हाईकोर्ट को बताया कि जांच अभी जारी है और पुराने गर्भगृह दरवाजों से लिए गए नमूनों का तुलनात्मक विश्लेषण किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इन सभी वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर तैयार अंतिम रिपोर्ट जल्द ही सौंप दी जाएगी। अब जांच का फोकस सोने की परत निकालने की प्रक्रिया और इसके पीछे जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान पर केंद्रित होगा।