2032 तक सेमीकंडक्टर पेशेवरों की भारी कमी, भारत को वैश्विक अवसर मिलने की संभावना : अश्विनी वैष्णव

  • Post By Admin on Aug 29 2025
2032 तक सेमीकंडक्टर पेशेवरों की भारी कमी, भारत को वैश्विक अवसर मिलने की संभावना : अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली : केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि 2032 तक दुनिया में लगभग 10 लाख सेमीकंडक्टर स्किल्ड पेशेवरों की कमी होगी और भारत के पास इस कमी को पूरा करने का बड़ा अवसर मौजूद है।

गुजरात के साणंद में सीजी पावर की भारत की पहली एंड-टू-एंड सेमीकंडक्टर ओएसएटी पायलट लाइन सुविधा के उद्घाटन के मौके पर मंत्री वैष्णव ने कहा कि यह पायलट लाइन सेमीकंडक्टर डिजाइन, निर्माण और डाउनस्ट्रीम क्षमताओं के विकास में निर्णायक कदम है। उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत तैयार चिप्स का उपयोग कस्टमर क्वालिफिकेशन के लिए किया जाएगा, और इसके सफल होने के बाद कमर्शियल प्लांट में पूर्ण पैमाने पर उत्पादन शुरू करना आसान होगा।

उन्होंने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य कुशल पेशेवरों की ग्लोबल पाइपलाइन तैयार करना है। अब तक इस मिशन के तहत 10 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है।

वैष्णव ने बताया कि सरकार ने 270 विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी कर उन्हें स्टेट-ऑफ-द-आर्ट सेमीकंडक्टर डिजाइन टूल्स उपलब्ध कराए हैं। 2025 में इन टूल्स का 1.2 करोड़ से अधिक बार उपयोग किया गया और 17 संस्थानों द्वारा डिजाइन की गई 20 चिप्स का निर्माण सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला (एससीएल), मोहाली में सफलतापूर्वक किया जा चुका है।

उन्होंने कहा, "दुनिया में बहुत कम देश अपने छात्रों को ऐसे एडवांस्ड टूल्स तक पहुंच प्रदान करते हैं। इस पहल से भारत के युवाओं को सशक्त किया जाएगा और टेक्निकल इकोसिस्टम मजबूत होगा। यह देश को सेमीकंडक्टर टैलेंट का ग्लोबल हब बनने की दिशा में अग्रसर करेगा।"

साणंद स्थित सीजी सेमी सुविधा चिप असेंबली, पैकेजिंग, परीक्षण और पोस्ट-टेस्ट सर्विस के लिए संपूर्ण समाधान प्रदान करती है, जिसमें ट्रेडिशनल और एडवांस्ड पैकेजिंग तकनीकें शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री ने इसे भारत की सेमीकंडक्टर क्षमताओं को मजबूत करने और वैश्विक बाजारों में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम करार दिया।