रेगिस्तान में मिसाइल ठिकानों का जाल बिछा रहा चीन, सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा
- Post By Admin on May 30 2026
नई दिल्ली : चीन के शिनजियांग क्षेत्र के दूरदराज रेगिस्तानी इलाकों में बड़े पैमाने पर सैन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण का खुलासा होने के बाद वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। हालिया सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से संकेत मिले हैं कि चीन अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से व्यापक सैन्य नेटवर्क विकसित कर रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, चीन भूमिगत मिसाइल साइलो के आसपास लॉन्च पैड, बंकर, संचार केंद्र और अन्य रणनीतिक ढांचे तैयार कर रहा है। माना जा रहा है कि इन क्षेत्रों में लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों की तैनाती की जा सकती है, जिससे किसी भी संभावित हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई की क्षमता बरकरार रखी जा सके। सैटेलाइट तस्वीरों में शिनजियांग के पूर्वी रेगिस्तान में स्थित दो बड़े अष्टकोणीय परिसरों के आसपास तेजी से विकसित हो रहे सैन्य ढांचे दिखाई दिए हैं। इन परिसरों में सैन्य वाहनों और कर्मियों के लिए सुविधाओं के साथ-साथ बख्तरबंद बंकर, हथियार भंडारण केंद्र, हवाई पट्टियां और रेलवे नेटवर्क भी मौजूद हैं, जो प्रमुख मिसाइल ठिकानों को जोड़ते हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि क्षेत्र में मोबाइल मिसाइल लॉन्चरों और वायु रक्षा प्रणालियों के संचालन के लिए 80 से अधिक कंक्रीट प्लेटफॉर्म बनाए गए हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, उपग्रह संचार तथा सैन्य कमांड एवं नियंत्रण गतिविधियों के लिए उपयोग की जाने वाली कई विशेष संरचनाएं भी देखी गई हैं। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के न्यूक्लियर इंफॉर्मेशन प्रोजेक्ट के निदेशक हंस क्रिस्टेंसन ने इस परियोजना को असाधारण बताते हुए कहा है कि इतने दुर्गम इलाके में इतने बड़े पैमाने पर सैन्य निर्माण अत्यंत महत्वपूर्ण संकेत देता है। वहीं पैसिफिक फोरम के विश्लेषक अलेक्जेंडर नील के अनुसार यह परियोजना केवल मिसाइल साइलो तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई दिखाई देती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम चीन की बहुस्तरीय परमाणु सुरक्षा रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिससे उसके रणनीतिक प्रतिरोध तंत्र को और मजबूत किया जा सके। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव लगातार बना हुआ है और दोनों देशों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। हालांकि चीन आधिकारिक तौर पर "नो फर्स्ट यूज" यानी पहले परमाणु हथियार का इस्तेमाल न करने की नीति का समर्थन करता है, लेकिन पश्चिमी देशों के कई रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बीजिंग अपनी बढ़ती सैन्य और परमाणु क्षमताओं के जरिए क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती परमाणु शक्ति के रूप में उभर रहा है। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि वर्ष 2030 तक चीन के पास लगभग एक हजार परमाणु हथियार हो सकते हैं। इसके साथ ही चीन अपनी उपग्रह आधारित निगरानी, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और मिसाइल चेतावनी तंत्र को भी आधुनिक बनाने में जुटा हुआ है।