गाड़ियों का ADAS सिस्टम भारतीय सड़कों पर वरदान या महंगा सिरदर्द
- Post By Admin on Jan 16 2026
नई दिल्ली: जब ‘ADAS’ यानी एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम का जिक्र होता है, तो दिमाग में ऐसी आधुनिक कार की तस्वीर उभरती है जो खुद-ब-खुद ब्रेक लगाए, लेन में बनी रहे और खतरे से पहले ड्राइवर को सतर्क कर दे। विदेशों में यह तकनीक कई जानें बचा चुकी है, लेकिन भारतीय सड़कों की हकीकत इससे काफी अलग है। यहां नियमों से ज्यादा जुगाड़ चलता है, ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि ADAS भारत में वाकई कारगर है या फिर ड्राइवरों के लिए एक महंगा सिरदर्द साबित हो रहा है।
क्या है ADAS तकनीक
ADAS दरअसल कार में लगे सेंसर, कैमरा और रडार का एक एडवांस पैकेज है, जो आसपास के खतरे पहचानने में मदद करता है। इसके प्रमुख फीचर्स में ऑटो इमरजेंसी ब्रेकिंग, लेन कीप असिस्ट और अडैप्टिव क्रूज कंट्रोल शामिल हैं। यह सिस्टम टक्कर की आशंका होने पर खुद ब्रेक लगा सकता है, कार को लेन के भीतर रखने की कोशिश करता है और आगे चल रही गाड़ी की गति के अनुसार अपनी स्पीड नियंत्रित करता है।
क्यों माना जा रहा है वरदान
सड़क दुर्घटनाओं का बड़ा कारण मानवीय भूल है। ADAS ऐसी स्थिति में ड्राइवर के लिए ‘तीसरी आंख’ की तरह काम करता है। लंबी दूरी के सफर में अडैप्टिव क्रूज कंट्रोल थकान कम करता है। वहीं, पैदल यात्रियों के अचानक सामने आ जाने पर सेंसर समय रहते ब्रेक लगाकर जान बचाने में मदद कर सकते हैं। हाईवे ड्राइविंग में यह तकनीक खास तौर पर राहत देने वाली मानी जा रही है।
क्यों बन रहा है परेशानी का कारण
भारतीय सड़कों पर बेतरतीब ट्रैफिक ADAS के लिए बड़ी चुनौती है। बिना इंडिकेटर लेन बदलने की आदत के कारण लेन कीप असिस्ट अचानक स्टीयरिंग में दखल दे सकता है, जिससे ड्राइवर घबरा जाता है। कई जगह सड़कों पर लेन मार्किंग ही नहीं होती, ऐसे में कैमरे भ्रमित हो जाते हैं। भीड़भाड़ वाले इलाकों में बाइक, ई-रिक्शा और पैदल यात्रियों की वजह से ‘फैंटम ब्रेकिंग’ की समस्या सामने आती है, जहां कार बिना जरूरत बार-बार ब्रेक लगा देती है। इससे पीछे से टक्कर का खतरा बढ़ जाता है। सबसे खतरनाक पहलू यह है कि कुछ लोग इसे सेल्फ-ड्राइविंग तकनीक समझकर लापरवाही करने लगते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
ADAS कोई जादू की छड़ी नहीं, बल्कि ड्राइवर की मदद करने वाली एक सहायक तकनीक है। भारतीय परिस्थितियों में इसका सही उपयोग बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों की मानें तो शहर की भीड़ में इसे सीमित या बंद रखना और हाईवे पर समझदारी से सपोर्ट सिस्टम के तौर पर इस्तेमाल करना ही बेहतर विकल्प है। सही समझ और सावधानी के साथ ADAS भारत में भी वरदान बन सकता है, अन्यथा यह तकनीक परेशानी का सबब भी बन सकती है।