भारत के पास बचा 25 दिन का कच्चा तेल, ईरान के रूट बंद ऐलान से पेट्रोल-डीजल के हाहाकार की आशंका
- Post By Admin on Mar 03 2026
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पैदा हुआ संकट भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। ईरान ने इजरायल-अमेरिका के साथ जारी संघर्ष के बीच होर्मुज स्ट्रेट रूट को बंद करने का ऐलान किया है। यह वही समुद्री गलियारा है, जिससे होकर भारत अपनी जरूरत का लगभग 50 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अगर यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो देश की तेल आपूर्ति, महंगाई और बाजार पर व्यापक असर पड़ सकता है।
भारत की आधी तेल सप्लाई इस रूट पर निर्भर
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग माना जाता है। भारत सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में तेल और गैस मंगाता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। रिपोर्टों के मुताबिक भारत को प्रतिदिन करीब 26 लाख बैरल कच्चा तेल इसी मार्ग से मिलता है। जनवरी-फरवरी में देश के कुल तेल आयात का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज के जरिए आया, जबकि नवंबर-दिसंबर 2025 में यह आंकड़ा 40 प्रतिशत था।
25 दिन का स्टॉक, लेकिन चिंता बरकरार
सरकार का कहना है कि देश के पास कच्चे तेल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है और घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक मौजूदा समय में देश के पास कच्चे तेल, गैस, एलपीजी और एलएनजी का लगभग 25 दिनों का स्टॉक ही उपलब्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपूर्ति बाधित हुई तो यह अवधि लंबी रणनीति के लिए पर्याप्त नहीं मानी जाएगी।
अंडरग्राउंड भंडार में 5.33 MMT की क्षमता
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने आपात स्थितियों से निपटने के लिए विशाखापत्तनम, मैंगलोर और पादुर में भूमिगत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाए हैं। इन भंडारों की कुल क्षमता लगभग 5.33 मिलियन मीट्रिक टन है। संकट की स्थिति में इन भंडारों का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने पर यह भी सीमित राहत ही दे पाएंगे।
100–120 डॉलर तक पहुंच सकता है कच्चा तेल
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि होर्मुज मार्ग बंद रहता है तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। फिलहाल ब्रेंट क्रूड करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। कीमतों में तेज उछाल का सीधा असर पेट्रोल-डीजल पर पड़ेगा। आकलन है कि दिल्ली में पेट्रोल 95 रुपये से बढ़कर 105 रुपये प्रति लीटर और डीजल 88 रुपये से बढ़कर 96 रुपये तक पहुंच सकता है।
नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट पर भी संकट
तेल के अलावा भारत का गैर-तेल निर्यात भी इस समुद्री मार्ग पर निर्भर है। रिपोर्टों के मुताबिक भारत के कुल नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सा होर्मुज रूट से होकर जाता है। इसमें बासमती चावल, चाय, मसाले, ताजे फल-सब्जियां और इंजीनियरिंग उत्पाद शामिल हैं। मार्ग बंद होने पर शिपिंग लागत बढ़ेगी, जिससे निर्यात महंगा होगा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ेगा।
रूस की ओर फिर झुक सकता है भारत
मिडिल ईस्ट में उथल-पुथल के बीच भारत एक बार फिर रूस से तेल खरीद बढ़ाने पर विचार कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार एशियाई जलक्षेत्र में लगभग 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल टैंकरों में उपलब्ध है। यदि भारत इन कार्गो की खरीद बढ़ाता है तो अपेक्षाकृत कम समय और लागत में आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है।
फरवरी में रूस से आयात घटा
अमेरिकी दबाव और प्रतिबंधों के चलते भारत ने हाल के महीनों में रूस से तेल आयात घटाया था। फरवरी में रूस से प्रतिदिन करीब 10 लाख बैरल तेल खरीदा गया, जो सितंबर 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर रहा। अब बदलते भू-राजनीतिक हालात में ऊर्जा रणनीति पर पुनर्विचार की संभावना जताई जा रही है।
बाजार और महंगाई पर असर संभव
विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की कीमतों में तेज वृद्धि का असर शेयर बाजार, सोना-चांदी और महंगाई दर पर भी दिख सकता है। ऊर्जा आयात पर बढ़ते खर्च से चालू खाता घाटा और राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार की ऊर्जा कूटनीति और रणनीतिक निर्णय बेहद अहम साबित होंगे।