रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का संयोग, जानें समय और सूतक काल

  • Post By Admin on Aug 22 2026
रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का संयोग, जानें समय और सूतक काल

नई दिल्ली : श्रावण मास की पूर्णिमा यानी 28 अगस्त 2026 को साल का दूसरा और आखिरी आंशिक चंद्र ग्रहण लगेगा। खास बात यह है कि इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा। पूर्णिमा, रक्षाबंधन और चंद्र ग्रहण का यह संयोग धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। हालांकि, भारत में यह चंद्र ग्रहण दिखाई नहीं देगा।

सुबह 6:55 बजे से शुरू होगा ग्रहण

चंद्र ग्रहण की शुरुआत सुबह 6 बजकर 55 मिनट पर उपच्छाया के स्पर्श से होगी। इसके बाद सुबह 8 बजकर 4 मिनट पर चंद्रमा पृथ्वी की प्रच्छाया में प्रवेश करेगा। ग्रहण का परमग्रास सुबह 9 बजकर 43 मिनट पर होगा। यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, जिसमें पृथ्वी की छाया चंद्रमा के एक बड़े हिस्से पर पड़ेगी।

भारत में नहीं दिखाई देगा चंद्र ग्रहण

साल 2026 का यह दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण भारत में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देगा। ग्रहण के दौरान चंद्रमा भारत के आकाश में अस्त स्थिति में होगा। यह खगोलीय घटना यूरोप, पश्चिमी एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर और अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगी।

क्या होता है सूतक काल?

हिंदू धार्मिक परंपरा में सूतक काल को ग्रहण से पहले की अवधि माना जाता है। मान्यता के अनुसार, इस दौरान कुछ धार्मिक एवं शुभ कार्यों को करने से परहेज किया जाता है। चंद्र ग्रहण के लिए सामान्यतः ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू माना जाता है, जबकि सूर्य ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले शुरू होने की मान्यता है।

हालांकि, सूतक की धार्मिक मान्यता सामान्यतः ग्रहण के दिखाई देने से जुड़ी मानी जाती है। चूंकि 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा।

रक्षाबंधन पर नहीं रहेगी ग्रहण संबंधी पाबंदी

भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण रक्षाबंधन के पर्व पर सूतक संबंधी विशेष पाबंदी नहीं रहेगी। ऐसे में भाई-बहन परंपरागत तरीके से राखी बांधकर रक्षाबंधन का पर्व मना सकेंगे। पूजा-पाठ, मंदिरों के कपाट और शुभ-मांगलिक कार्यों पर भी ग्रहण संबंधी रोक लागू नहीं होगी।