भारत को व्यापारिक झटका : बांग्लादेश ने कपास खरीद के लिए अमेरिका से मिलाया हाथ
- Post By Admin on Feb 13 2026
ढाका : बांग्लादेश में आम चुनावों के बीच एक अहम कूटनीतिक और आर्थिक फैसला सामने आया है, जिसने भारत-बांग्लादेश व्यापारिक संबंधों को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने कपड़ा उद्योग के लिए कपास की खरीद अब भारत के बजाय अमेरिका से करने का निर्णय लिया है। यह समझौता चुनाव से ठीक तीन दिन पहले 9 फरवरी को अमेरिका के साथ किया गया, जिसे अब तक गोपनीय रखा गया था।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह द्विपक्षीय व्यापार समझौता बांग्लादेश के रेडीमेड गारमेंट्स सेक्टर के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। मुख्य सलाहकार के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने एक साक्षात्कार में इस डील को बांग्लादेशी अर्थव्यवस्था के लिए ‘गेम चेंजर’ बताया है। समझौते के तहत अमेरिका ने बांग्लादेशी कपड़ों पर लगने वाले टैरिफ में एक प्रतिशत की कटौती करते हुए इसे 19 प्रतिशत कर दिया है, जो अब कंबोडिया और इंडोनेशिया जैसे देशों के बराबर हो गया है। इसके अलावा, यदि बांग्लादेश अमेरिकी कपास या मानव निर्मित फाइबर से कपड़े तैयार करता है, तो उन पर अमेरिका में कोई शुल्क नहीं लगेगा और निर्यात शून्य ड्यूटी पर होगा।
इस फैसले को भारत-बांग्लादेश संबंधों में आई तल्खी से जोड़कर देखा जा रहा है। अगस्त 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट और भारत द्वारा उन्हें शरण दिए जाने के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। वर्ष 2024 में भारत ने बांग्लादेश को करीब 1.6 अरब डॉलर का कपास धागा निर्यात किया था, लेकिन बाद में व्यापारिक रिश्तों में गिरावट आई। अप्रैल 2025 में बांग्लादेश ने जमीनी रास्ते से भारतीय कपास के आयात पर रोक लगा दी थी, जबकि इसके जवाब में भारत ने मई 2025 से बांग्लादेशी रेडीमेड गारमेंट्स की जमीनी एंट्री बंद कर दी थी। अब अमेरिका से हुए इस नए समझौते ने भारत के लिए बांग्लादेश का बड़ा कपास बाजार लगभग बंद कर दिया है
हालांकि, विशेषज्ञ इस डील को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। ब्रैक यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री प्रोफेसर सलीम जहान का कहना है कि अमेरिका से कपास मंगवाना भौगोलिक दूरी के कारण महंगा साबित हो सकता है, जिससे शिपिंग लागत काफी बढ़ेगी और टैरिफ में मिली राहत का लाभ कम हो जाएगा। वहीं, गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। टेक्सटाइल सेक्टर में भारतीय और मिस्र की कपास को बेहतर माना जाता है, जबकि अमेरिकी कपास अगर उस स्तर पर खरी नहीं उतरी तो बांग्लादेशी परिधान अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्वीकृत भी हो सकते हैं।
इस तरह, अमेरिका के साथ यह समझौता बांग्लादेश के लिए एक तरफ अवसर लेकर आया है, तो दूसरी ओर भारत के लिए यह एक बड़ा व्यापारिक और कूटनीतिक झटका माना जा रहा है।