ट्रंप की उम्मीदों के बीच भारत की शर्त: सस्ती एलएनजी पर ही आगे बढ़ेगा व्यापार
- Post By Admin on Feb 13 2026
न्यूयॉर्क : ऊर्जा सुरक्षा और किफायती कीमतों के बीच संतुलन साधते हुए भारत ने अमेरिका को अपने रुख से अवगत करा दिया है। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा है कि उसे ऊर्जा जरूरतों के लिए गैस तो चाहिए, लेकिन महंगी गैस किसी भी सूरत में नहीं खरीदी जाएगी। पेट्रोनेट एलएनजी के सीईओ अक्षय कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिकी गैस की कीमतें प्रतिस्पर्धी और किफायती होंगी, तभी भारत वहां से एलएनजी आयात पर विचार करेगा।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों के लिए सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा सुनिश्चित करना है। अगर गैस की कीमतें नियंत्रण में रहेंगी, तभी लोग इसे पेट्रोल, डीजल और कोयले जैसे पारंपरिक ईंधनों के बेहतर विकल्प के तौर पर अपनाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि महंगी गैस से न केवल आम उपभोक्ता प्रभावित होता है, बल्कि उद्योग और बिजली उत्पादन सेक्टर की लागत भी बढ़ जाती है।
भारत का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब भारत-अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करने की कोशिशें तेज हैं। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क में कटौती की घोषणा की थी, जिसके बदले अमेरिका भारत से अपने निर्यात में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 132 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत करीब 41 अरब डॉलर के व्यापारिक लाभ में है।
भारत सरकार ने 2030 तक देश के कुल ऊर्जा मिश्रण में गैस की हिस्सेदारी को मौजूदा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। फर्टिलाइजर, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन, रिफाइनरी और बिजली उत्पादन जैसे क्षेत्रों में गैस की मांग तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, सस्ती गैस की कमी के कारण देश की करीब 27,000 मेगावॉट गैस आधारित बिजली क्षमता का बड़ा हिस्सा पूरी तरह उपयोग में नहीं आ पा रहा है।
पेट्रोनेट एलएनजी, जो फिलहाल कतर और ऑस्ट्रेलिया से मुख्य रूप से गैस आयात करता है, अब आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए लंबी अवधि के समझौतों की तलाश में है। कंपनी अपने मौजूदा टर्मिनलों की क्षमता बढ़ा रही है और पूर्वी तट पर एक नए आयात टर्मिनल के निर्माण की भी योजना पर काम कर रही है, ताकि भविष्य में देश के हर हिस्से तक सस्ती गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
कुल मिलाकर भारत का स्पष्ट संदेश यही है कि वह ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है, लेकिन शर्त सिर्फ एक है—गैस सस्ती होनी चाहिए, तभी किसी भी तरह का बड़ा सौदा संभव होगा।