मध्य पूर्व में शांति की नई उम्मीद, अमेरिका-ईरान समझौते के दावों ने बढ़ाई हलचल

  • Post By Admin on Jun 15 2026
मध्य पूर्व में शांति की नई उम्मीद, अमेरिका-ईरान समझौते के दावों ने बढ़ाई हलचल

जिनेवा/तेहरान : अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी मेहर न्यूज ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच 14 प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी है और इस समझौते पर शुक्रवार को जिनेवा में हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। हालांकि, प्रस्तावित दस्तावेज की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर दोनों पक्षों के दावों में मतभेद भी सामने आए हैं।

जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में ईरान की फ्रीज की गई 24 अरब डॉलर की संपत्तियों को जारी करने का प्रावधान शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 60 दिनों की वार्ता अवधि के दौरान यह राशि चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि 12 अरब डॉलर की पहली किस्त बातचीत शुरू होने से पहले जारी की जानी है। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने इस दावे का खंडन किया है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि ईरान की कोई भी अवरुद्ध संपत्ति तब तक जारी नहीं की जाएगी, जब तक तेहरान समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं करता। अधिकारी ने कहा कि यह "प्रदर्शन के बदले भुगतान" की नीति पर आधारित व्यवस्था होगी।

ईरानी मीडिया के अनुसार प्रस्तावित 14 सूत्रीय समझौते में लेबनान समेत विभिन्न मोर्चों पर सैन्य अभियानों को समाप्त करना, होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को निलंबित करना तथा परमाणु कार्यक्रम को लेकर 60 दिनों की विशेष वार्ता शामिल है। दस्तावेज में यह भी उल्लेख किया गया है कि ईरान परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के तहत परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराएगा। वहीं अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर तक की योजनाएं पेश करने का भी दावा किया गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर सहमति बनने का दावा किए जाने के बाद इस प्रस्तावित समझौते को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं। ट्रंप ने कहा था कि समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा, जिससे क्षेत्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को राहत मिलेगी। दूसरी ओर, ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा है कि अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर से पहले 60 दिनों की वार्ता प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका को पहले युद्धविराम, नाकेबंदी समाप्त करने और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करने जैसी शर्तों पर कार्रवाई करनी होगी। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो इससे पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव कम हो सकता है। हालांकि दोनों देशों के बीच वित्तीय रियायतों, प्रतिबंधों और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं, जिससे समझौते के अंतिम स्वरूप पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।