इबोला संक्रमण ने बढ़ाई चिंता, शहरी इलाकों में बढ़ते संक्रमण से डब्ल्यूएचओ परेशान
- Post By Admin on May 20 2026
जिनेवा : विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पूर्वी कांगो में तेजी से फैल रहे इबोला वायरस को लेकर गंभीर चिंता जताई है। डब्ल्यूएचओ प्रमुख डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा है कि इबोला संक्रमण अब दूरदराज इलाकों से निकलकर घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों तक पहुंच चुका है, जिससे हालात और गंभीर हो सकते हैं।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार कांगो में अब तक इबोला वायरस से 134 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 500 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं। संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। जिनेवा में आयोजित वर्ल्ड हेल्थ असेंबली को संबोधित करते हुए डॉ. टेड्रोस ने कहा कि संक्रमण के प्रभाव और प्रसार को देखते हुए मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। उन्होंने बताया कि अब मामले केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बड़े शहरों में भी सामने आ रहे हैं, जो वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक इबोला के तेजी से फैलने के पीछे ‘बंडीबुग्यो’ नामक नए स्ट्रेन को जिम्मेदार माना जा रहा है। बताया गया कि शुरुआती चरण में अधिकारियों ने सामान्य इबोला प्रकार की जांच की, जिसके परिणाम नकारात्मक आए। बाद में पता चला कि संक्रमण बंडीबुग्यो स्ट्रेन का है, जिसके लिए फिलहाल कोई प्रभावी दवा या टीका उपलब्ध नहीं है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल रिसर्च के वायरस विशेषज्ञ जीन-जैक्स मुयम्बे ने बताया कि ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित प्रायोगिक टीके की खेप अमेरिका और ब्रिटेन से कांगो भेजे जाने की उम्मीद है। वहीं कांगो में डब्ल्यूएचओ टीम की प्रमुख डॉ. ऐनी एंसिया ने कहा कि एर्वेबो वैक्सीन के उपयोग पर भी विचार किया जा रहा है, हालांकि यह इबोला के दूसरे वेरिएंट के खिलाफ इस्तेमाल होती है।
इस बीच यूनिसेफ ने राहत कार्य तेज करते हुए 16 टन राहत सामग्री कांगो भेजी है। इसमें कीटाणुनाशक, साबुन, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण, जल शोधन गोलियां और पानी के टैंक शामिल हैं। यूनिसेफ की बुनिया ब्यूरो प्रमुख हेला स्खीरी ने बताया कि राहत सामग्री को इटुरी प्रांत के विभिन्न केंद्रों में जरूरत के अनुसार वितरित किया जाएगा। जानकारी के अनुसार कांगो के इटुरी प्रांत की राजधानी बुनिया, गोमा और बुटेंबो क्षेत्रों में संक्रमण के मामले सामने आए हैं। उल्लेखनीय है कि इबोला वायरस पहली बार वर्ष 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। यह संक्रमित व्यक्ति के रक्त, उल्टी और शरीर के अन्य तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है। कांगो में यह इबोला का 17वां प्रकोप है। इससे पहले वर्ष 2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में इबोला संक्रमण से 11 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई थी।