संस्कृत के बिना संस्कृति की रक्षा संभव नहीं : पद्मश्री संतोष यादव
- Post By Admin on Jan 21 2026
लखीसराय : विश्व प्रसिद्ध पर्वतारोही एवं दो बार माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली विश्व की एकमात्र महिला, पद्मश्री संतोष यादव बुधवार को बड़हिया पहुँचीं। उन्होंने मां बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर में पूजा-अर्चना कर सिद्धपीठ का दर्शन किया तथा इसके बाद जवाहर नवोदय विद्यालय बड़हिया, किड्स भारती स्कूल चुहरचक और भीमराव अम्बेडकर आवासीय विद्यालय बिहरौरा में छात्र-छात्राओं से संवाद किया।
जवाहर नवोदय विद्यालय में अपने प्रेरक संबोधन में उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की रक्षा संस्कृत भाषा के बिना संभव नहीं है। देश के सांस्कृतिक विकास के लिए तमिल और संस्कृत के समन्वय को उन्होंने आवश्यक बताया। साथ ही पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए छात्रों से फास्ट फूड एवं पैकेट बंद भोजन से दूर रहने की अपील की।
किड्स भारती स्कूल चुहरचक में छोटे बच्चों से संवाद करते हुए उन्होंने जल की बर्बादी न करने तथा पोशाक के रूप में सूती कपड़े के प्रयोग की सलाह दी। वहीं भीमराव अम्बेडकर आवासीय विद्यालय में उन्होंने छात्राओं से आत्मनिर्भर, साहसी और प्रकृति-प्रेमी बनने का आह्वान किया।
इसके बाद संतोष यादव ने लखीसराय संग्रहालय का भ्रमण किया, जहाँ विभिन्न प्राचीन मूर्तियों, कलाकृतियों और दुर्लभ सिक्कों को देखकर वे काफी अभिभूत हुईं। उन्होंने कहा कि यहाँ विरासत को जिस प्रकार सहेज कर रखा गया है, वह प्रशंसनीय है और इससे उन्हें आत्मिक शांति का अनुभव हुआ।
मां बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर परिसर में प्रतिभा चयन एकता मंच बड़हिया के उपाध्यक्ष डॉ. रामप्रवेश सिंह एवं सचिव पीयूष कुमार झा ने उन्हें अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर जवाहर नवोदय विद्यालय के प्राचार्य नवीन कुमार सिन्हा, मुकुंद कुमार, ज्ञान रंजन, ऋतिक रोशन, अम्बेडकर आवासीय विद्यालय के प्राचार्य मुकुल कुमार सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि पद्मश्री संतोष यादव विश्व की एकमात्र महिला हैं जिन्होंने दो बार 8,848 मीटर ऊँचे माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की। उन्हें इस अद्वितीय उपलब्धि के लिए भारत सरकार द्वारा पद्मश्री तथा 1994 में राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
उनका यह दौरा विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा, संस्कार और आत्मविश्वास का संदेश बनकर सामने आया।