लखीसराय जिला बार एसोसिएशन चुनाव पर उठे सवाल, निष्पक्षता को लेकर अधिवक्ताओं में असंतोष

  • Post By Admin on Mar 14 2026
लखीसराय जिला बार एसोसिएशन चुनाव पर उठे सवाल, निष्पक्षता को लेकर अधिवक्ताओं में असंतोष

लखीसराय : जिला विधिज्ञ संघ लखीसराय के वर्ष 2026 के चुनाव परिणाम को लेकर अधिवक्ताओं के बीच असंतोष और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। अधिवक्ता रजनीश कुमार ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि अध्यक्ष पद के लिए घोषित परिणाम अकल्पनीय, अविश्वसनीय और संदेहास्पद प्रतीत होता है।

बताया गया कि काफी प्रयासों के बाद पटना उच्च न्यायालय के आदेश तथा बिहार राज्य बार काउंसिल के निर्देशन व पर्यवेक्षण में 12 मार्च 2026 को जिला विधिज्ञ संघ लखीसराय का चुनाव कराया गया था। हालांकि अधिवक्ताओं का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान बार काउंसिल का पर्यवेक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह गया।

अधिवक्ता रजनीश कुमार के अनुसार मतदाता सूची के प्रकाशन से लेकर मतदान तक कई चरणों में अनियमितताएं देखने को मिलीं। उनका आरोप है कि नामांकन पंजी की सत्यता की जांच किए बिना मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई और बिना किसी वैध साक्ष्य के उसमें बड़े पैमाने पर फेरबदल किया गया। उन्होंने कहा कि दर्जनों नियमित अधिवक्ताओं—निरंजन कुमार, रंजीत पासवान, विमलेश कुमार विमल, विमल यादव और उमेश मंडल सहित अन्य—के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए, जबकि लगभग 100 कथित फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़ दिए गए।

आरोप यह भी लगाया गया है कि चुनाव से लगभग 12 घंटे पहले तक भी मतदाता सूची में नए नाम जोड़े गए, जिसकी जानकारी अधिकांश प्रत्याशियों को नहीं दी गई। साथ ही बार काउंसिल के निर्देशों के बावजूद मतदान प्रक्रिया की वीडियोग्राफी नहीं कराई गई। मतगणना के दौरान कई मतपत्रों पर क्रम संख्या नहीं थी और किसी भी मतपत्र पर चुनाव पदाधिकारी के हस्ताक्षर नहीं पाए गए, जिससे चुनाव की वैधता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इसके अलावा बिना पहचान पत्र के कुछ अनियमित और निष्क्रिय सदस्यों से भी मतदान कराने का आरोप लगाया गया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि इस तरह की अनियमितताओं के कारण पूरी चुनाव प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई है।

विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया गया कि लगभग 90 प्रतिशत नियमित अधिवक्ताओं ने एक नियमित अधिवक्ता प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया था, लेकिन अनियमित और निष्क्रिय मतदाताओं के आधार पर दूसरे प्रत्याशी को अध्यक्ष पद पर विजयी घोषित कर दिया गया।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नियमित अधिवक्ता प्रत्याशी और उनके समर्थक चुनाव परिणाम के खिलाफ विधिक अपील दायर करने की तैयारी में जुट गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर वे दोबारा पटना उच्च न्यायालय की शरण लेने की भी तैयारी कर रहे हैं, ताकि संघ की गरिमा और पारदर्शिता की पुनर्स्थापना सुनिश्चित की जा सके।