विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 के विरोध में दूसरे दिन भी काली पट्टी बांधकर काम पर डटे शिक्षक-कर्मचारी

  • Post By Admin on Aug 06 2026
विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 के विरोध में दूसरे दिन भी काली पट्टी बांधकर काम पर डटे शिक्षक-कर्मचारी

मुजफ्फरपुर : प्रस्तावित ‘विश्वविद्यालय अधिनियम-2026’ के विरोध में विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक तथा शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघर्ष मोर्चा के चरणबद्ध आंदोलन के तहत गुरुवार को दूसरे दिन भी बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय कार्यालय, सभी विभागों और संबद्ध महाविद्यालयों में शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर कार्य किया।

संघर्ष मोर्चा का आरोप है कि प्रस्तावित अधिनियम राज्य के विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता तथा विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के बीच स्थापित अन्योन्याश्रयी संबंध-व्यवस्था को कमजोर करने वाला है। इसी के विरोध में पहले चरण के आंदोलन के तहत शांतिपूर्ण प्रतिरोध जारी रखा गया। काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराने वालों में लंगट सिंह महाविद्यालय, रामदयालु सिंह महाविद्यालय, महंथ दर्शन दास महिला महाविद्यालय, राममनोहर लोहिया स्मारक कॉलेज, रामेश्वर महाविद्यालय, नीतिश्वर महाविद्यालय, श्री राधाकृष्ण गोयनका महाविद्यालय, रामसेवक सिंह साइंस कॉलेज, श्री लक्ष्मीकिशोरी महाविद्यालय सीतामढ़ी, आर.एन. कॉलेज, डी.सी. कॉलेज, जमुनीलाल महाविद्यालय, वैशाली महिला महाविद्यालय हाजीपुर, बी.एम.डी. कॉलेज दयालपुर, समता कॉलेज जन्दाहा, आर.पी.एस. कॉलेज चकियाज (महनार), एल.एन.डी. कॉलेज, एस.एन.एस. कॉलेज, एस.के. वूमेन्स कॉलेज मोतिहारी, एम.जे.के. कॉलेज तथा आर.एल.एस.वाई. कॉलेज बेतिया सहित कई संस्थानों के शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी शामिल रहे।

अध्यक्षों और प्राचार्यों सहित शिक्षकों-कर्मचारियों ने इसे विश्वविद्यालय व्यवस्था की रक्षा का प्रश्न बताते हुए आंदोलन को आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया। विभिन्न इकाइयों में विरोध कार्यक्रम के दौरान एकजुटता और संगठनात्मक मजबूती पर विशेष जोर दिया गया। इसी दौरान राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुटाब) के अध्यक्ष प्रो. कन्हैया बहादुर सिन्हा के निधन पर कई महाविद्यालयों और विश्वविद्यालय इकाइयों में शोक सभाएं भी आयोजित की गईं। वक्ताओं ने उनके निधन को राज्य के शिक्षक आंदोलन और संगठन के लिए बड़ी क्षति बताया तथा उनके योगदान को स्मरण किया।

शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघों के शीर्ष नेताओं ने आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के लिए सभी शिक्षकों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक और कर्मचारी इसी प्रकार एकजुट बने रहे तो विश्वविद्यालय स्वायत्तता और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर बड़ी से बड़ी लड़ाई भी सफलतापूर्वक लड़ी जा सकेगी।