विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बचाने को शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी एकजुट, कल होगा राज्यव्यापी धरना
- Post By Admin on Aug 09 2026
मुजफ्फरपुर : प्रस्तावित ‘विश्वविद्यालय अधिनियम-2026’ के विरोध में बिहार के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में आंदोलन तेज हो गया है। बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक तथा शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघर्ष मोर्चा ने राज्यभर के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के सभी विश्वविद्यालय विभागों एवं कॉलेजों के शिक्षक-कर्मचारियों से 10 अगस्त को सामूहिक अवकाश लेकर अपने-अपने विश्वविद्यालय मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है।
संघर्ष मोर्चा का आरोप है कि प्रस्तावित विधेयक विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और उनके पारस्परिक संबंधों को प्रभावित करेगा। इसी के विरोध में चरणबद्ध संघर्षात्मक कार्यक्रम चलाया जा रहा है। राज्य संघर्ष मोर्चा के संयोजक प्रो. संजय कुमार सिंह, सदस्य राघवेन्द्र कुमार सिंह तथा बीआरए बिहार विश्वविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघर्ष मोर्चा के संयोजक मंडल के सदस्य डॉ. सुनील कुमार सिंह, प्रो. रमेश प्रसाद गुप्ता, प्रो. ललन कुमार झा, राम कुमार और राजीव कुमार ने आंदोलन के पहले चरण को सफल बनाने के लिए राज्यभर के शिक्षक-कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया है।
संघर्ष मोर्चा के नेताओं ने कहा कि दूसरे चरण के तहत 10 अगस्त को सभी शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहकर विश्वविद्यालय मुख्यालयों में एकजुट होंगे और प्रस्तावित विश्वविद्यालय विधेयक-2026 के विरोध में धरना देंगे। उन्होंने अधिकाधिक संख्या में भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है।
मोर्चा ने तीसरे चरण के कार्यक्रम की भी घोषणा की है। इसके तहत 11 अगस्त से 25 अगस्त तक प्रतिदिन दोपहर 1:30 बजे से 2:00 बजे तक शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी अपने कार्यस्थलों पर एकत्र होकर प्रस्तावित विधेयक के खिलाफ जन-जागरण के उद्देश्य से नारे लगाएंगे। चौथे चरण में 5 सितंबर 2026 को शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी और छात्रों के बीच संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रस्तावित विधेयक के संभावित दुष्प्रभावों पर चर्चा की जाएगी।
आंदोलन को समर्थन देने वालों में बुस्टा के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. जयकांत सिंह और अतिथि प्राध्यापक संघ के अध्यक्ष डॉ. ललित किशोर भी शामिल हैं। संघर्ष मोर्चा के नेताओं ने कहा कि यदि शिक्षक और कर्मचारी इसी तरह एकजुट बने रहे तो वे अपनी मांगों को लेकर प्रभावी लड़ाई लड़ने में सफल होंगे। इस घोषणा के बाद बीआरए बिहार विश्वविद्यालय सहित राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में आंदोलन को लेकर हलचल तेज हो गई है और सोमवार को होने वाले सामूहिक अवकाश तथा धरना-प्रदर्शन पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।