बिहार कोकिला शारदा सिन्हा की स्मृति में पौधारोपण, पर्यावरण भारती ने दिया हरित संदेश
- Post By Admin on Nov 05 2026
लखीसराय : बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका एवं बिहार कोकिला स्वर्गीय शारदा सिन्हा की पुण्यतिथि पर 5 नवंबर को पर्यावरण भारती की ओर से लखीसराय जिले के चानन प्रखंड स्थित मननपुर बस्ती, भलुई में पौधारोपण अभियान चलाया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व पर्यावरण प्रहरी हिमालय ने किया, जबकि सामाजिक कार्यकर्ता अरुण कुमार सिंह ने सहयोग प्रदान किया। इस अवसर पर लोगों ने पौधारोपण के माध्यम से दिवंगत लोक गायिका को श्रद्धांजलि अर्पित की और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
पर्यावरण भारती के संस्थापक, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के प्रांत संयोजक और अखिल भारतीय पेड़ उपक्रम टोली के सदस्य राम बिलास शाण्डिल्य ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा करना देश के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। दीपावली और छठ जैसे पर्वों पर लोगों को पर्यावरण अनुकूल उपहार देने की परंपरा विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उपहार देते समय प्लास्टिक और पॉलीथिन के बजाय कपड़े या जूट के थैलों का इस्तेमाल करना चाहिए। उपहार में पौधे और प्राकृतिक बीज देने से भी प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भाव बढ़ेगा। उन्होंने लोगों से सूखे मेवे और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य सामग्री उपहार में देने की अपील की। दही और मिठाई मिट्टी के बर्तनों में देने से स्थानीय कारीगरों को रोजगार मिलेगा। अतिथियों को पानी पिलाने के लिए प्लास्टिक के गिलास और बोतलों के स्थान पर स्टील के बर्तनों का उपयोग करने की सलाह दी गई। उपहार की पैकिंग में चमकीले प्लास्टिक रैपर के बजाय कपड़े और पुराने कागज का इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया गया। पर्यावरण भारती की ओर से संदेश दिया गया कि त्योहारों में खुशियां बांटें, कचरा नहीं। ऐसे उपहार चुनें जो प्रकृति के अनुकूल हों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं। संस्था ने स्थानीय उत्पादों और पर्यावरण हितैषी वस्तुओं को बढ़ावा देने की अपील करते हुए ‘वैश्विक सोच, स्थानीय पहल और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन’ का संदेश दिया।
पर्यावरणविद नवीन कुमार ने स्वर्गीय शारदा सिन्हा के जीवन और संगीत यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि शारदा सिन्हा का निधन 5 नवंबर 2024 को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में हुआ था। उनका जन्म 1 अक्टूबर 1952 को बिहार के सुपौल जिले के राघोपुर प्रखंड अंतर्गत हुलास गांव में हुआ था। बचपन से ही संगीत में रुचि रखने वाली शारदा सिन्हा ने भोजपुरी, मैथिली, मगही और हिंदी में अपनी गायकी से अलग पहचान बनाई। उनका विवाह वर्ष 1970 में बेगूसराय जिले के सिहमा गांव निवासी बृज किशोर सिन्हा से हुआ था। उन्होंने संगीत में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की और समस्तीपुर महिला कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में भी कार्य किया। उन्होंने अपने भाई की शादी में पहली बार गीत गाया था। वर्ष 1974 में भोजपुरी गीतों से उनकी संगीत यात्रा को पहचान मिली। वर्ष 1978 में उनका छठ गीत ‘उग हो सूरज देव’ श्रोताओं के बीच लोकप्रिय हुआ। वर्ष 1989 में उन्होंने पहला फिल्मी गीत गाया। पंडित रामचंद्र झा और पंडित रघु झा उनके प्रमुख संगीत गुरुओं में शामिल थे। लोक संगीत में उनके योगदान के लिए उन्हें कई सम्मान मिले। इनमें 1987 का बिहार गौरव पुरस्कार, 1988 का बिहार रत्न, 1991 का पद्मश्री, 2000 में संगीत नाटक अकादमी सम्मान, 2006 का देवी अहिल्याबाई पुरस्कार, 2015 का बिहार सरकार सिनेमा पुरस्कार और 2018 का पद्म भूषण शामिल हैं। वर्ष 2025 में उन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
पौधारोपण कार्यक्रम में सरिता शंकर, संजू देवी, अरुण कुमार सिंह, संजीव कश्यप, अक्षत आनंद, आदित्य आनंद, हिमालय, सुनील कुमार, दिनेश गुप्ता, नवीन कुमार, दीपक सुंदरम, सत्येंद्र कुमार, श्रवण कुमार, राम बिलास शाण्डिल्य, विजय शंकर, संजय कुमार, दिलीप कुमार और सिद्धार्थ कुमार सहित कई लोगों ने भाग लिया।