कस्तूरबा गांधी पुण्यतिथि पर शांति सेना की सर्वधर्म प्रार्थना सभा, बा के संघर्षमय जीवन का स्मरण
- Post By Admin on Feb 22 2026
मुजफ्फरपुर : शांति सेना मुजफ्फरपुर इकाई की ओर से कस्तूरबा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर गांधी पार्क, सिकंदरपुर में सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, युवाओं और स्थानीय नागरिकों ने भाग लेकर ‘बा’ के त्यागमय जीवन को नमन किया।
सभा को संबोधित करते हुए शांति सेना के जिला अध्यक्ष सोनू सरकार ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास महिलाओं के योगदान के बिना अधूरा है, लेकिन कस्तूरबा गांधी का नाम स्वतंत्रता, साहस और समर्पण का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने कहा कि ‘बा’ केवल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पत्नी ही नहीं थीं, बल्कि उनके संघर्षों की सहभागी, सहयोगी और कई बार मार्गदर्शक भी रहीं। निरक्षर होने के बावजूद उन्होंने सामाजिक कुरीतियों और अन्याय के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाई।
वक्ताओं ने कस्तूरबा गांधी के जीवन के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख किया। बताया गया कि 14 वर्ष की आयु में उनका विवाह 13 वर्षीय मोहनदास करमचंद गांधी से हुआ। जब गांधीजी इंग्लैंड से बैरिस्टर बनकर लौटे और बाद में दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ आंदोलन छेड़ा, तब कस्तूरबा ने हर मोर्चे पर उनका साथ दिया। दक्षिण अफ्रीका में स्वच्छता और समानता के मुद्दे पर गांधीजी के साथ उनके वैचारिक मतभेद का प्रसंग भी साझा किया गया, जिसमें अंततः उन्होंने गांधीजी के सिद्धांतों को समझते हुए उनका समर्थन किया।
सभा में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान की घटनाओं को भी याद किया गया। 9 अगस्त 1942 को गांधीजी और उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी के बाद की परिस्थितियों का जिक्र करते हुए बताया गया कि आगा खां महल में नजरबंदी के दौरान गांधीजी के सचिव महादेव देसाई का निधन हुआ। कस्तूरबा उन्हें पुत्र समान मानती थीं। 22 फरवरी 1944 को महाशिवरात्रि के दिन आगा खां महल, पुणे में कस्तूरबा गांधी ने भी अंतिम सांस ली। उनका निधन भी गांधीजी की गोद में हुआ। बाद में वहीं उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां आज भी उनकी स्मृति में प्रतीकात्मक चिह्न विद्यमान हैं।
वक्ताओं ने कहा कि यदि कस्तूरबा गांधी का धैर्य, त्याग और नैतिक शक्ति न होती, तो महात्मा गांधी का व्यक्तित्व उस ऊंचाई तक नहीं पहुंच पाता, जिसे आज विश्व आदर के साथ स्मरण करता है। कस्तूरबा का जीवन इस बात का प्रमाण है कि स्वतंत्रता संग्राम केवल राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक जागरण का भी आंदोलन था।
सर्वधर्म प्रार्थना सभा का संचालन अर्जुन गुप्ता ने किया, जबकि सभा का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन अभिनव कुमार ने किया। कार्यक्रम में कृष्णा कुमार, अर्जुन कुमार, मुन्ना कुमार, मो. अरशद, कमल कुमार, शैलेन्द्र कुमार, संजय रजक, राहुल कुमार दास, विकास कुमार, हरीकिशोर राय, विष्णु कुमार, माधुरी कुमारी, राजा बाबू, विपिन कुमार, संजीव कुमार चौधरी, प्रमोद कुमार, मुकेश कुमार और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने कस्तूरबा गांधी के आदर्शों—अहिंसा, समानता, सेवा और सामाजिक सद्भाव—को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।