मुजफ्फरपुर में गूंजे मोहब्बत और इंसानियत के अशआर, गजल संग्रह का भी हुआ लोकार्पण

  • Post By Admin on Nov 01 2026
मुजफ्फरपुर में गूंजे मोहब्बत और इंसानियत के अशआर, गजल संग्रह का भी हुआ लोकार्पण

मुजफ्फरपुर : शहर के हमीदी कॉम्प्लेक्स में रविवार, 1 नवंबर को डॉ. अंसारी आसी अदबी साहित्यिक संगम के तत्वावधान में भव्य मुशायरे का आयोजन किया गया। साहित्यिक और सांस्कृतिक माहौल में आयोजित इस कार्यक्रम में शायरों एवं कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रेम, इंसानियत, संघर्ष और सामाजिक संवेदनाओं को अभिव्यक्त किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सैयद एम. हसन ने की, जबकि मंच संचालन श्रवण कुमार ने किया।

मुशायरे की शुरुआत शायरा एवं कवयित्री सविता राज की गजल के सस्वर पाठ से हुई। उनकी पंक्तियां 'गोद में बच्चे लिए हर रोज ही, स्वप्न कुछ गढ़ती रही हैं बेटियां' ने श्रोताओं का ध्यान खींचा और खूब सराहना बटोरी। इसके बाद श्रवण कुमार ने अपनी गजल के जरिए उम्मीद और हौसले का संदेश दिया। उनके शेर 'आशा के दीप हरदम मन में जलाए रखना, बदलेगा फिर जमाना, हिम्मत बनाए रखना' पर श्रोताओं ने तालियों से उत्साह बढ़ाया।

आलम सिद्दीकी ने अपने खास अंदाज में गजल पेश करते हुए कहा, 'अब मुझे आंख दिखाता है वही सौदागर, मिलने आया था कभी आंखों में आंसू लेकर।' वहीं अली अहमद मंज़र ने अपनी रचना के माध्यम से नफरत मिटाकर इंसानियत और मोहब्बत को बढ़ावा देने का संदेश दिया। उनके शेर 'इंसान जो नफरत को मिटाने निकल आए, हर दिल में मोहब्बत के खजाने निकल आए' को श्रोताओं ने खूब पसंद किया। शायर महफूज आरिफ ने 'जीतने वाले हार जाएंगे, हम उन्हें आईना दिखाएंगे' सुनाकर महफिल में तालियां बटोरीं। शायरा डॉ. आरती कुमारी ने भी अपनी भावपूर्ण गजल प्रस्तुत की। उनकी पंक्तियां 'कहानी की तरह तुमको सुना सकती नहीं सबको, तुम्हें गीतों के जैसे गुनगुना कर साथ रखना है' को श्रोताओं ने सराहा।

कार्यक्रम के आयोजक डॉ. सिबगतुल्लाह हमीदी ने अपनी रचना के जरिए सच का साथ देने और संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उनकी पंक्तियां 'कहा, सच की राह को चुनकर देख, कांटों पर तू चलकर देख' ने भी श्रोताओं की प्रशंसा हासिल की। मुशायरे के दौरान शायरा एवं कवयित्री डॉ. आरती कुमारी के उर्दू गजल संग्रह 'मुन्तज़िर है दिल' का लोकार्पण भी किया गया। बताया गया कि इस संग्रह को उर्दू निदेशालय से स्वीकृति प्राप्त है। पुस्तक के लोकार्पण को कार्यक्रम का महत्वपूर्ण साहित्यिक पड़ाव माना गया।

कार्यक्रम में मौजूद साहित्यप्रेमियों ने सभी शायरों और कवियों की प्रस्तुतियों की सराहना की। अंत में आयोजक डॉ. सिबगतुल्लाह हमीदी ने अतिथियों, रचनाकारों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। साहित्य, शायरी और आपसी सौहार्द के वातावरण में आयोजित यह मुशायरा यादगार बन गया।