जनजातीय चिकित्सा पर लखीसराय में सेमिनार, पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक रूप देने पर जोर

  • Post By Admin on Oct 30 2026
जनजातीय चिकित्सा पर लखीसराय में सेमिनार, पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक रूप देने पर जोर

लखीसराय : जनजातीय समाज की समृद्ध पारंपरिक चिकित्सा और स्वास्थ्य प्रणालियों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के उद्देश्य से लखीसराय संग्रहालय सभागार में एक दिवसीय जिला स्तरीय सेमिनार का आयोजन किया गया। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय, बिहार सरकार के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग तथा बिहार अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सेमिनार की अध्यक्षता जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार ने की। कार्यक्रम में सूर्यगढ़ा और चानन प्रखंड के 32 अनुसूचित जनजाति बहुल गांवों के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुए इस सेमिनार का मुख्य विषय 'चिकित्सा एवं परंपरागत स्वास्थ्य प्रणालियाँ' था। स्वागत भाषण में जिला कल्याण पदाधिकारी अश्विनी कुमार चौबे ने रेखांकित किया कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धति केवल बीमारियों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक और समग्र शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ रखने में भी सक्षम है। अनुमंडल पदाधिकारी प्रभाकर कुमार और अपर समाहर्ता नीरज कुमार ने इस आयोजन को जनजातीय समाज के समग्र उत्थान और उनकी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए बेहद उपयोगी बताया।

उप विकास आयुक्त सुमित कुमार ने जनजातीय गोत्रों की उत्पत्ति, सांस्कृतिक निषेधों (टैबू) और जनजातीय समाज की प्राकृतिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) से जुड़े वैज्ञानिक पहलुओं को विस्तार से रखा। तकनीकी सत्र के दौरान डॉ. संतोष कुमार, डॉ. सुनील कुमार सिंह, डॉ. तरन्नुम फातिमा और डॉ. सुधांशु कुमार ने औषधीय पौधों के संरक्षण, पारंपरिक चिकित्सकों की भूमिका और पारंपरिक पद्धतियों को आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ एकीकृत करने पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिए।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार ने जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए प्रशासनिक प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने राजघाट कोल में वितरित लेमन ग्रास के औषधीय पौधों का संदर्भ देते हुए आह्वान किया कि सूर्यगढ़ा एवं चानन के जनजातीय बहुल गांवों को औषधीय पौधों के प्रमुख हब के रूप में विकसित किया जाएगा। डीएम ने आश्वस्त किया कि सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा। कार्यक्रम में उपस्थित जनजातीय समुदाय के लोगों से सीधा संवाद कर फीडबैक भी लिया गया, जिसके बाद बिहार गीत के साथ सेमिनार का विधिवत समापन हुआ। इस दौरान स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, उद्यान सहित विभिन्न विभागों के वरीय अधिकारी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।