दर्द से राहत और रीढ़ की सेहत पर नई पुस्तक लेकर आए डॉ. रजनीश कांत
- Post By Admin on Nov 05 2026
पटना: रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य, दर्द से जुड़ी समस्याओं और काइरोप्रैक्टिक उपचार पद्धति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से फिजियोथेरेपिस्ट, ऑस्टियोपैथ एवं काइरोप्रैक्टर डॉ. रजनीश कांत की पुस्तक ‘राजनीश कांत मेथड (आरकेएम)’ का विमोचन किया गया। होटल पाटलिपुत्रा एग्जोटिका, एक्जीबिशन रोड में आयोजित समारोह में जगत गुरु महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने पुस्तक का लोकार्पण किया। इस अवसर पर पुस्तक के लेखक डॉ. रजनीश कांत और फिल्म अभिनेता जय सिंह राठौड़ भी मौजूद रहे। टीएस पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक स्वास्थ्य संबंधी जटिल विषयों को सरल भाषा में समझाने का प्रयास करती है।
विमोचन समारोह में हिमांगी सखी ने पुस्तक और डॉ. रजनीश कांत के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि डॉक्टर का कार्य लोगों को स्वस्थ और बेहतर जीवन देने का प्रयास करना है। चिकित्सा सेवा समाज के लिए महत्वपूर्ण है और चिकित्सकों के योगदान का सम्मान किया जाना चाहिए।
पुस्तक में कुल 10 अध्याय हैं। इनमें काइरोप्रैक्टिक देखभाल की बुनियादी जानकारी, क्लिनिकल अवलोकन, रीढ़ की हड्डी का स्वास्थ्य, खिलाड़ियों एवं बुजुर्गों की देखभाल, उपचार से जुड़ी गलत धारणाएं और मरीजों को जागरूक करने जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा स्वयं की देखभाल, आरकेएम पद्धति, क्लिनिक संचालन और अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ समन्वय स्थापित करने से संबंधित जानकारियां भी दी गई हैं। इस अवसर पर डॉ. रजनीश कांत ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल दर्द का उपचार करना नहीं, बल्कि लोगों को लंबे समय तक दर्द के साथ जीने की मजबूरी से बाहर निकालने के लिए जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि पुस्तक के माध्यम से काइरोप्रैक्टिक पद्धति की बुनियादी जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने चिकित्सकों के सम्मान पर जोर देते हुए कहा कि डॉक्टर का मूल कार्य उपचार करना और मरीज को बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करना है। उपचार के दौरान मरीज की शारीरिक स्थिति के साथ उसकी मानसिक स्थिति का भी ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि चिकित्सक लोगों को स्वस्थ जीवन देने के लिए निरंतर प्रयास करते हैं, इसलिए उनके कार्यों का सम्मान होना चाहिए। डॉ. रजनीश कांत ने बताया कि पुस्तक के आगामी संस्करण में अपनी व्यक्तिगत उपचार तकनीक के बारे में और विस्तार से जानकारी देने की योजना है। गौरतलब है कि कुंभ के दौरान भी डॉ. कांत ने शिविर लगाकर साधु-संतों को उपचार संबंधी सेवाएं प्रदान की थीं।