खुदीराम बोस की धरोहर बचाने की मांग के साथ ऐतिहासिक कटघरे को संरक्षित करने की अपील

  • Post By Admin on Aug 10 2026
खुदीराम बोस की धरोहर बचाने की मांग के साथ ऐतिहासिक कटघरे को संरक्षित करने की अपील

मुजफ्फरपुर: देश के महान क्रांतिकारी अमर शहीद खुदीराम बोस से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। बिहार विधान परिषद सदस्य वंशीधर ब्रजवासी ने मांग की है कि 1908 के बहुचर्चित मुजफ्फरपुर बम कांड से जुड़े ऐतिहासिक अदालत भवन और उस कटघरे को, जहां खड़े होकर खुदीराम बोस ने अपने ऊपर लगे आरोप सुने थे, राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर संरक्षित किया जाए। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर समाहरणालय के बगल में स्थित वर्तमान जिला खनन कार्यालय वही ऐतिहासिक भवन है, जहां अंग्रेजी शासन के दौरान खुदीराम बोस के मुकदमे की सुनवाई हुई थी। जानकारी के अनुसार 1 मई 1908 को जिला मजिस्ट्रेट एच.सी. उडमैन की अदालत में सुनवाई शुरू हुई थी। बाद में 23 मई 1908 को प्रथम मजिस्ट्रेट ई.डब्ल्यू. ब्रेट हाउस के समक्ष उनका बयान दर्ज हुआ और 8 जून 1908 से अंतिम सुनवाई के लिए पटना से जज कार्नडफ को बुलाया गया। उन्होंने 13 जून 1908 को इसी अदालत में खुदीराम बोस को फांसी की सजा सुनाई थी।

वंशीधर ब्रजवासी ने आरोप लगाया कि आज उसी भवन में जिला खनन कार्यालय संचालित हो रहा है और कार्यालय के गोदाम में रखा ऐतिहासिक कटघरा उपेक्षा का शिकार है। उनके अनुसार कटघरा टूटे हुए फर्नीचर और अन्य सामानों के बीच पड़ा है, गोदाम का लकड़ी का दरवाजा जाम हो चुका है और खिड़कियों से आने वाले पानी के कारण यह अमूल्य धरोहर लगातार क्षतिग्रस्त हो रही है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक यह कटघरा अपेक्षाकृत सुरक्षित था, लेकिन अब टूट-फूट कर बिखरने की स्थिति में पहुंच गया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि जिला खनन कार्यालय को किसी अन्य भवन में स्थानांतरित किया जाए और ऐतिहासिक कटघरे की मरम्मत कर उसे पुनः उसी अदालत भवन में स्थापित किया जाए। साथ ही इस भवन को स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े मुजफ्फरपुर के सभी शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों का केंद्र बनाया जाए, जहां उनकी तस्वीरें और जीवन परिचय प्रदर्शित किए जाएं।

ब्रजवासी ने कहा कि यह भवन केवल मुजफ्फरपुर ही नहीं, बल्कि पूरे देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जुड़ा राष्ट्रीय महत्व का स्थल है। इसलिए इसे संरक्षित कर राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां खुदीराम बोस के बलिदान और स्वतंत्रता आंदोलन के गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सकें।