धान अधिप्राप्ति में गड़बड़ी का आरोप, मिलरों ने पैक्स और विभागीय कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
- Post By Admin on Aug 13 2026
लखीसराय : धान अधिप्राप्ति वर्ष 2025-26 को लेकर जिले में सहकारिता विभाग और खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग (एसएफसी) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए राइस मिल उद्योग से जुड़े लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि विभागीय स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार और समन्वय की कमी के कारण समयानुसार चावल की प्राप्ति पूरी तरह नहीं हो सकी है।
मिलरों का आरोप है कि पैक्स द्वारा समय पर धान की आपूर्ति नहीं किए जाने से चावल आपूर्ति की प्रक्रिया प्रभावित हुई। उनका कहना है कि सामान्यतः मिलर पहले अग्रिम रूप से चावल की आपूर्ति करते हैं और उसके बाद उन्हें धान उपलब्ध कराया जाता है। ऐसी स्थिति में मिलरों पर गबन का मामला बनाना उचित नहीं है।
राइस मिल उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि संबंधित विभाग वास्तविक स्थिति को जिला प्रशासन के समक्ष सही ढंग से प्रस्तुत नहीं कर रहे हैं और तथ्यों को छिपाकर मिलरों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है। इससे उद्योग प्रभावित हो रहा है तथा मिलरों को अनावश्यक परेशानियों और आर्थिक शोषण का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि पैक्स को आवंटित धान की मात्रा का हिसाब उपलब्ध नहीं है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित पैक्स की होनी चाहिए और आवश्यक होने पर उन्हीं के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए। मिलरों का दावा है कि पटना सहित कई अन्य जिलों में ऐसे मामलों में पैक्स पर ही प्राथमिकी दर्ज की गई है, जबकि लखीसराय और कुछ अन्य छोटे जिलों में मिलरों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
मिलरों ने यह भी कहा कि वे सरकारी कार्यों में एसएफसी के सहयोगी के रूप में काम करते हैं और धान-चावल आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए बिना समुचित जांच के उन पर कार्रवाई करना उद्योग के हित में नहीं है। राइस मिल उद्योग से जुड़े लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि धान की आपूर्ति में वास्तविक कमी कहां हुई और उसके लिए जिम्मेदार कौन है। साथ ही उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर उचित कार्रवाई करने तथा उद्योग को अनावश्यक दबाव से मुक्त रखने की मांग की है।