सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की जाति जनगणना रोकने की याचिका, भाषा पर जताई आपत्ति
- Post By Admin on Apr 11 2026
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने देश में प्रस्तावित जाति जनगणना पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई। सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिका में इस्तेमाल की गई भाषा और उसकी प्रस्तुति पर कड़ा ऐतराज जताया।
यह याचिका चिराग हरिवंदन मोदी की ओर से दायर की गई थी, जिस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार को जाति जनगणना रोकने का निर्देश देने की मांग की थी। इसके साथ ही ऐसे परिवारों के लिए विशेष नीति बनाने का अनुरोध किया गया था, जिनमें केवल एक ही बच्चा है।
सुनवाई के दौरान याचिका की भाषा और ड्राफ्टिंग को देखकर मुख्य न्यायाधीश ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि याचिका में जिस तरह की भाषा का उपयोग किया गया है, वह न्यायालय की गरिमा के अनुरूप नहीं है। अदालत ने इस याचिका को सुनने से इनकार करते हुए इसे खारिज कर दिया।
इधर जाति जनगणना का मुद्दा देश में इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। केंद्रीय गृह मंत्रालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि देश में होने वाली जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी और जाति से संबंधित आंकड़ों का संग्रह दूसरे चरण में किया जाएगा। पहले चरण में मकानों की सूची तैयार करने और उनसे संबंधित जानकारी एकत्र करने का कार्य किया जाएगा। सरकार ने पहले चरण में पूछे जाने वाले 33 प्रश्नों की अधिसूचना भी जारी कर दी है, जिनमें घर से जुड़ी सुविधाएं, परिवार की संरचना और अन्य बुनियादी जानकारियां शामिल हैं।
इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में एक अन्य मामले में भी दिलचस्प स्थिति देखने को मिली, जब अदालत ने अधिवक्ता सचिन गुप्ता द्वारा एक साथ दायर की गई 25 जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इन याचिकाओं में विभिन्न विषयों पर नीति बनाने की मांग की गई थी।
मुख्य न्यायाधीश ने अधिवक्ता को सलाह देते हुए कहा कि फिलहाल अपने पेशे पर ध्यान केंद्रित करें और समाज में जागरूकता बढ़ाने के प्रयास करें। अदालत की टिप्पणी के बाद अधिवक्ता ने अपनी सभी याचिकाएं वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया।