पीएम मोदी का भरोसा—परिसीमन में नहीं होगा किसी राज्य के साथ अन्याय
- Post By Admin on Apr 16 2026
नई दिल्ली : संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा में पेश किए गए। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन को संबोधित करते हुए इसे भारतीय संसदीय लोकतंत्र का ऐतिहासिक क्षण बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण को 25-30 वर्ष पहले ही लागू कर देना चाहिए था, जिससे अब तक यह और अधिक परिपक्व हो चुका होता। उन्होंने कहा कि विकसित भारत केवल आधारभूत संरचना या आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि नीति निर्धारण में समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि देश की 50 प्रतिशत आबादी यानी महिलाओं की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी समय की मांग है।
परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंताओं पर प्रधानमंत्री ने स्पष्ट आश्वासन दिया कि किसी भी राज्य—चाहे वह उत्तर का हो या दक्षिण का, छोटा हो या बड़ा—के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह इस बात की गारंटी देने को तैयार हैं और सरकार की नीयत पूरी तरह साफ है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण का विरोध करने वालों को जनता ने कभी माफ नहीं किया है। उन्होंने 2024 के चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि सभी दलों की सहमति से महिला आरक्षण विधेयक पारित हुआ, जिससे लोकतंत्र मजबूत हुआ। उन्होंने अपील की कि इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित में देखा जाए।
उन्होंने कहा कि आज हर क्षेत्र में महिलाएं उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और राजनीति में उनकी बढ़ती भागीदारी को स्वीकार करना जरूरी है। प्रधानमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 2029 तक भी इसे लागू नहीं किया गया, तो महिलाओं का विश्वास टूट सकता है।
सरकार द्वारा पेश किए गए तीन विधेयकों में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं। संविधान संशोधन विधेयक के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है, जिससे महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का मार्ग प्रशस्त होगा। परिसीमन विधेयक में नई जनगणना के आधार पर सीटों के पुनर्विन्यास और आयोग के गठन का प्रावधान है। वहीं, तीसरा विधेयक केंद्र शासित प्रदेशों के कानूनों में आवश्यक संशोधन से संबंधित है।