यूएन सुरक्षा परिषद सुधार पर भारत का सख्त रुख, दो-स्तरीय स्थायी सदस्यता का विरोध
- Post By Admin on Apr 15 2026
नई दिल्ली : भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर एक बार फिर अपना स्पष्ट रुख सामने रखा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने दो-स्तरीय (टू-टियर) स्थायी सदस्यता के प्रस्ताव का विरोध किया है, जबकि नए स्थायी सदस्यों के लिए वीटो अधिकार के उपयोग को 15 वर्षों तक टालने के प्रस्ताव पर सहमति जताई है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि वर्तमान सुरक्षा परिषद का ढांचा असंतुलित है और इसकी वैधता व प्रतिनिधित्व पर सवाल उठते हैं। उन्होंने सदस्यता और वीटो प्रणाली को इस असंतुलन का प्रमुख कारण बताते हुए दोनों में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारत ने स्पष्ट किया कि केवल नई श्रेणी बनाकर स्थायी सदस्यता देना, लेकिन उसमें वीटो अधिकार शामिल न करना, असमानता को और बढ़ाएगा। भारत का मानना है कि किसी भी वास्तविक सुधार के लिए वीटो अधिकार के साथ स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाना जरूरी है।
भारत, जी4 समूह (भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान) का सदस्य है, जो सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता के विस्तार की मांग करता रहा है। इस समूह ने प्रस्ताव दिया है कि नए स्थायी सदस्य 15 वर्षों तक वीटो अधिकार का उपयोग न करें और उसके बाद इस पर समीक्षा की जाए। भारत ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।
भारत ने यह भी कहा कि 1965 में हुए सुधार के बाद केवल अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई, जिससे वीटो रखने वाले देशों की शक्ति और बढ़ गई। इसलिए अब स्थायी सदस्यता में विस्तार के साथ वीटो व्यवस्था पर भी संतुलित सुधार आवश्यक है।
वहीं, इटली और पाकिस्तान जैसे कुछ देशों ने स्थायी सदस्यता के विस्तार का विरोध करते हुए कहा है कि इससे परिषद की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, भारत का मानना है कि अधिक प्रतिनिधित्व से परिषद और अधिक लोकतांत्रिक बनेगी।
भारत ने वीटो प्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसका उपयोग अक्सर राष्ट्रीय हितों के आधार पर किया जाता है और इस पर प्रभावी नियंत्रण के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में बदलाव आवश्यक है।
इस मुद्दे पर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज है और आने वाले समय में सुरक्षा परिषद सुधार को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय होने की संभावना जताई जा रही है।