भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद ने पकड़ा नया मोड़, मामला पहुंचा शीर्ष अदालत
- Post By Admin on May 22 2026
नई दिल्ली : मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मुस्लिम पक्ष ने भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर मानने और हिंदू समुदाय को विशेष पूजा अधिकार देने वाले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, काजी मोइनुद्दीन की ओर से विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की गई है। यह मामला डायरी नंबर 32281/2026 के तहत दर्ज किया गया है और फिलहाल विचाराधीन है। यह याचिका मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ द्वारा 15 मई को दिए गए फैसले के खिलाफ दायर की गई है।
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने अपने निर्णय में भोजशाला परिसर को राजा भोज की संपत्ति और हिंदू मंदिर माना था। अदालत ने कहा था कि हिंदू समुदाय का पूजा का अधिकार कभी समाप्त नहीं हुआ। हाई कोर्ट ने 7 अप्रैल 2003 की उस व्यवस्था को भी मूल स्वरूप के विपरीत बताया था, जिसके तहत परिसर में नमाज की अनुमति दी गई थी। अदालत ने हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार देने के साथ मुस्लिम समुदाय के लिए वैकल्पिक भूमि पर मस्जिद निर्माण पर विचार करने की बात कही थी। फैसले में अदालत ने वर्ष 2024 में हुए पुरातात्विक सर्वेक्षण का उल्लेख करते हुए कहा था कि परिसर में संस्कृत शिलालेख, हवन कुंड और हिंदू मंदिर वास्तुकला से जुड़े कई प्रमाण मिले हैं। फैसले के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने 16 मई 2026 को नया आदेश जारी कर हिंदू समुदाय को भोजशाला परिसर में पूजा और मां सरस्वती से जुड़े अध्ययन कार्यों के लिए निर्बाध प्रवेश की अनुमति दी थी। हालांकि प्रशासनिक नियंत्रण एएसआई के पास ही रहेगा। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह प्रयास करने का भी निर्देश दिया था कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां सरस्वती की प्राचीन प्रतिमा को भारत वापस लाया जाए।
इधर हिंदू पक्ष ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट याचिका दाखिल की है। जितेंद्र सिंह विशेन की ओर से दायर इस याचिका में अनुरोध किया गया है कि हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल किसी भी याचिका पर उनका पक्ष सुने बिना कोई अंतरिम आदेश पारित न किया जाए। गौरतलब है कि भोजशाला विवाद लंबे समय से मध्य भारत के सबसे संवेदनशील धार्मिक और ऐतिहासिक मामलों में शामिल रहा है। हिंदू पक्ष इसे राजा भोज द्वारा स्थापित मां सरस्वती के मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र के रूप में देखता है, जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यहां सदियों से कमाल मौला मस्जिद मौजूद है।