जियो क्रेडिट में बैंक ऑफ अमेरिका की एंट्री, ₹18,268 करोड़ निवेश का समझौता

  • Post By Admin on Aug 12 2026
जियो क्रेडिट में बैंक ऑफ अमेरिका की एंट्री, ₹18,268 करोड़ निवेश का समझौता

मुंबई : भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र में एक बड़ा निवेश सौदा सामने आया है। जियो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (JFSL) और बैंक ऑफ अमेरिका ने जियो क्रेडिट लिमिटेड में संयुक्त उद्यम स्थापित करने के लिए समझौता किया है। इस समझौते के तहत बैंक ऑफ अमेरिका जियो क्रेडिट में 49.9 प्रतिशत तक हिस्सेदारी हासिल कर सकता है। इक्विटी शेयर और वारंट के पूर्ण सब्सक्रिप्शन के बाद बैंक का कुल निवेश ₹18,268 करोड़ तक पहुंच सकता है। हालांकि यह सौदा विभिन्न नियामकीय और वैधानिक मंजूरियों के अधीन रहेगा।

समझौते के अनुसार पहले चरण में बैंक ऑफ अमेरिका को जियो क्रेडिट में 26.5 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी मिलेगी। वारंट के उपयोग के बाद इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 49.9 प्रतिशत तक हो सकती है। सौदे के बाद जियो क्रेडिट के निदेशक मंडल में जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और बैंक ऑफ अमेरिका का समान प्रतिनिधित्व होगा, जबकि कंपनी की मौजूदा प्रबंधन टीम ही कारोबार और रणनीतिक संचालन की जिम्मेदारी संभालेगी। जियो क्रेडिट देश की तेजी से उभरती गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) में शामिल है। कंपनी ने महज दो वर्षों के संचालन में 30 जून 2026 तक ₹30,667 करोड़ का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) हासिल कर लिया है। कंपनी रिटेल, कमर्शियल और सप्लाई चेन फाइनेंस समेत विभिन्न ऋण उत्पादों के क्षेत्र में सेवाएं प्रदान कर रही है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने इस साझेदारी को विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि बड़े पैमाने, भरोसे और समावेशिता पर आधारित वित्तीय तंत्र देश की प्रगति के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और बैंक ऑफ अमेरिका की साझेदारी तकनीक और वैश्विक विशेषज्ञता के माध्यम से भारतीयों के लिए ऋण सेवाओं को अधिक आसान, पारदर्शी और सुलभ बनाएगी।

वहीं बैंक ऑफ अमेरिका के चेयर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी ब्रायन मोयनिहान ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण विकासशील बाजारों में से एक है और यह निवेश देश के भविष्य में बैंक के विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जियो फाइनेंशियल ने बहुत कम समय में उल्लेखनीय विस्तार किया है और दोनों कंपनियों की संयुक्त ताकत वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ भारत की आर्थिक वृद्धि को भी नई गति देगी।