अमेरिकी अदालत ने ट्रंप की टैरिफ नीति को बताया अवैध, 10 प्रतिशत शुल्क निरस्त
- Post By Admin on May 08 2026
वाशिंगटन : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ नीति के मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। न्यूयॉर्क स्थित अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ को अवैध और अमान्य करार दिया है। अदालत ने कहा कि यह कदम राष्ट्रपति को कांग्रेस द्वारा दिए गए अधिकारों की सीमा से बाहर था।
तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 का गलत इस्तेमाल किया। अदालत के अनुसार राष्ट्रपति को मिले अधिकारों का दायरा सीमित है और इस प्रकार का व्यापक शुल्क लगाना कानून के अनुरूप नहीं था। हालांकि पीठ के एक न्यायाधीश ने फैसले से असहमति जताते हुए कहा कि संबंधित कानून राष्ट्रपति को शुल्क निर्धारण के व्यापक अधिकार प्रदान करता है।
यह मामला वाशिंगटन राज्य की मसाला कंपनी ‘बर्लैप एंड बैरल’ और खिलौना निर्माता ‘बेसिक फन’ समेत कुछ आयातकों की ओर से दायर याचिका पर आधारित था। इन कंपनियों ने वैश्विक टैरिफ को चुनौती दी थी। अदालत ने अपने आदेश में ट्रंप प्रशासन को याचिकाकर्ताओं से इन शुल्कों की वसूली तत्काल रोकने और पहले से वसूले गए शुल्क वापस करने का निर्देश दिया है। हालांकि यह फैसला फिलहाल केवल याचिकाकर्ताओं और वाशिंगटन राज्य तक सीमित रहेगा।कोर्ट ने सभी आयातकों पर टैरिफ रोकने के लिए व्यापक निषेधाज्ञा जारी करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने विश्वव्यापी रोक लगाने के लिए पर्याप्त आधार प्रस्तुत नहीं किए हैं।
बताया गया कि ट्रंप प्रशासन ने इस वर्ष फरवरी में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने व्यापक टैरिफ रद्द किए जाने के बाद अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क लागू किया था। इसकी समय सीमा 24 जुलाई को समाप्त होनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से ट्रंप प्रशासन की व्यापार और टैरिफ नीति को बड़ा कानूनी झटका लगा है। वहीं प्रशासन के पास इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देने का विकल्प मौजूद है।