एक मां, दो पिता, डीएनए टेस्ट ने खोला चौंकाने वाला राज, दुनिया में गिने-चुने ऐसे केस

  • Post By Admin on Apr 30 2026
एक मां, दो पिता, डीएनए टेस्ट ने खोला चौंकाने वाला राज, दुनिया में गिने-चुने ऐसे केस

कोलंबिया: कोलंबिया से सामने आई एक अनोखी और हैरान कर देने वाली घटना ने वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम लोगों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। यह मामला सिर्फ एक पारिवारिक रहस्य नहीं, बल्कि विज्ञान की दुनिया में दुर्लभतम घटनाओं में गिना जाने वाला उदाहरण बन गया है।

साल 2018 में एक महिला अपने दो साल के जुड़वां बेटों के पितृत्व की पुष्टि कराने के लिए कोलंबिया की नेशनल यूनिवर्सिटी स्थित “लेबोरेटरी ऑफ पॉपुलेशन जेनेटिक्स एंड आइडेंटिफिकेशन” पहुंचीं। यह एक सामान्य प्रक्रिया थी, जैसा कि हजारों लोग हर साल करवाते हैं। लेकिन इस बार जो नतीजा सामने आया, उसने लैब के अनुभवी वैज्ञानिकों को भी चौंका दिया।पहले परीक्षण में ही संकेत मिल गया कि मामला सामान्य नहीं है। वैज्ञानिकों ने परिणाम की पुष्टि के लिए दोबारा टेस्ट किया। लेकिन दूसरी बार भी वही नतीजा सामने आया जुड़वां बच्चों की मां तो एक ही है, लेकिन उनके पिता अलग-अलग हैं। यह घटना विज्ञान की भाषा में “हेटेरोपैटर्नल सुपरफेकंडेशन” कहलाती है। दुनिया भर में अब तक ऐसे सिर्फ लगभग 20 मामलों का ही दस्तावेजी उल्लेख मिलता है। यानी यह घटना इतनी दुर्लभ है कि लाखों-करोड़ों मामलों में एक बार सामने आती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह तब संभव होता है जब एक ही माहवारी चक्र के दौरान महिला के शरीर से दो या अधिक अंडे निकलते हैं, और बहुत कम समय के अंतराल में दो अलग-अलग पुरुषों के स्पर्म से उनका निषेचन (फर्टिलाइजेशन) हो जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में कई दुर्लभ परिस्थितियों का एक साथ होना जरूरी होता है जैसे एक ही समय में दो अंडों का निकलना (पॉलीओव्यूलेशन), अलग-अलग समय पर संबंध बनना, और दोनों अंडों का सफलतापूर्वक निषेचित हो जाना। इस केस की जांच के लिए वैज्ञानिकों ने माइक्रोसैटेलाइट मार्कर तकनीक का उपयोग किया। इसमें मां, दोनों बच्चों और संभावित पिता के डीएनए के कई बिंदुओं की तुलना की जाती है। प्रत्येक व्यक्ति के डीएनए से 15 से 22 विशेष मार्कर लिए जाते हैं और उनका मिलान किया जाता है। लैब के डायरेक्टर प्रोफेसर विलियम उसाक्वेन के अनुसार, “हमने 17 माइक्रोसैटेलाइट पॉइंट्स का विश्लेषण किया। एक बच्चे का डीएनए पिता से पूरी तरह मेल खाता था, जबकि दूसरे का बिल्कुल नहीं। अपने 26 साल के करियर में यह पहला ऐसा मामला था जिसे हमने खुद देखा।” वैज्ञानिकों ने किसी भी तकनीकी गलती की संभावना को खत्म करने के लिए पूरे परीक्षण को दोहराया। सैंपल बदलने या प्रोसेसिंग एरर जैसी सभी आशंकाओं को खारिज किया गया, लेकिन नतीजा फिर भी वही रहा। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि ऐसे जुड़वां बच्चे कभी भी एक जैसे (आइडेंटिकल) नहीं होते, क्योंकि आइडेंटिकल ट्विन्स एक ही अंडे और स्पर्म से बनते हैं। जबकि इस मामले में दो अलग-अलग अंडों का अलग-अलग स्पर्म से निषेचन हुआ।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह घटना इसलिए भी कम सामने आती है क्योंकि ज्यादातर लोग पितृत्व जांच नहीं करवाते। लेकिन आधुनिक तकनीक और डीएनए टेस्टिंग के बढ़ते चलन के कारण भविष्य में ऐसे मामलों की पहचान बढ़ सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि मानव शरीर की जैविक प्रक्रियाएं जितनी जटिल हैं, उतनी ही अद्भुत भी हैं। विज्ञान के लिए यह एक महत्वपूर्ण केस स्टडी है, लेकिन इसके साथ ही शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में शामिल लोगों की निजता और सम्मान सर्वोपरि है। यह कहानी सिर्फ एक वैज्ञानिक खोज नहीं, बल्कि उस अनदेखी दुनिया की झलक है, जहां प्रकृति अपने नियम खुद लिखती है और कभी-कभी उन नियमों से हमें चौंका भी देती है।