ताइवान के पास मिसाइल तैनात करेगा जापान, चीन से बढ़ सकता है टकराव

  • Post By Admin on Feb 26 2026
ताइवान के पास मिसाइल तैनात करेगा जापान, चीन से बढ़ सकता है टकराव

टोक्यो : पूर्वी एशिया में सामरिक संतुलन को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए जापान ने ताइवान के निकट अपने सबसे पश्चिमी द्वीप पर मिसाइल तैनात करने की योजना का ऐलान किया है। जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने कहा कि जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलें मार्च 2031 तक योनागुनी द्वीप पर तैनात कर दी जाएंगी।

जापानी समाचार एजेंसी के अनुसार, ये मिसाइलें विमान और बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम होंगी। कोइज़ुमी ने बताया कि तैनाती की प्रक्रिया प्रगति पर निर्भर करेगी, लेकिन लक्ष्य वर्ष 2030-31 रखा गया है।

चीन-जापान संबंधों में तल्खी

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब जापान और चीन के बीच ताइवान की सुरक्षा को लेकर तनाव चरम पर है। जापान की प्रधानमंत्री **साने ताकाइची** पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि यदि ताइवान को लेकर कोई संघर्ष जापान की सुरक्षा के लिए खतरा बनता है, तो उनका देश ठोस कदम उठाएगा।

चीन ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का कड़ा विरोध करता है। जापान के रुख के बाद बीजिंग ने अपने नागरिकों को जापान न जाने की सलाह दी और जापानी कंपनियों के डुअल-यूज निर्यात पर रोक लगा दी।

सामरिक दृष्टि से अहम योनागुनी

योनागुनी द्वीप ताइवान से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित है और यहां पहले से ही जापान की सेल्फ डिफेंस फोर्स (SDF) की सुविधा मौजूद है। 2016 में यहां बेस स्थापित किया गया था। द्वीप पर तैनात रडार साइट्स के जरिए चीनी नौसेना की गतिविधियों पर 24 घंटे नजर रखी जाती है।

2015 में स्थानीय जनमत संग्रह में बहुमत ने एसडीएफ बेस के पक्ष में मतदान किया था। हालांकि अब मिसाइल तैनाती की योजना से स्थानीय लोगों में सैन्य टकराव की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई है।

सेनकाकू द्वीप विवाद भी बना कारण

टोक्यो और बीजिंग के बीच सेनकाकू द्वीप (जिन्हें चीन दियाओयू कहता है) को लेकर भी विवाद जारी है। यह क्षेत्र योनागुनी से लगभग 150 किलोमीटर दूर है, जहां चीनी जहाजों की गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच लगातार तनातनी बनी रहती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जापान का यह कदम पूर्वी चीन सागर में बढ़ती चीनी सैन्य सक्रियता के जवाब के रूप में देखा जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय भू-राजनीति में तनाव और बढ़ना तय है।