अमेरिका की अत्यधिक मांगों के कारण वार्ता विफल : ईरान
- Post By Admin on Apr 12 2026
इस्लामाबाद : पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ता रविवार को बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। ईरान ने इसके लिए अमेरिका की “अत्यधिक मांगों” को जिम्मेदार ठहराया, जबकि अमेरिकी पक्ष ने तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर अडिग रुख को प्रमुख कारण बताया।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि कुछ मुद्दों पर सहमति बनने के बावजूद दो-तीन अहम विषयों पर मतभेद बने रहे, जिसके चलते वार्ता किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कूटनीति की प्रक्रिया जारी रहेगी और बातचीत के रास्ते बंद नहीं हुए हैं।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने कहा कि अमेरिका ने अपना “अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव” पेश किया था, लेकिन ईरान ने उसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ, जिससे समझौते की संभावनाएं खत्म हो गईं।
शनिवार से शुरू हुई इस गहन वार्ता के दौरान दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत, संदेशों और दस्तावेजों का आदान-प्रदान हुआ। चर्चा के प्रमुख मुद्दों में होर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु कार्यक्रम, युद्ध क्षतिपूर्ति, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय संघर्ष का अंत शामिल रहे।
बकाई ने कहा कि वार्ता की सफलता अमेरिका की गंभीरता और सद्भावना पर निर्भर करती है। उन्होंने जोर दिया कि अवैध मांगों से परहेज और ईरान के वैध अधिकारों को स्वीकार करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि वार्ता अविश्वास और संदेह के माहौल में हुई, ऐसे में एक ही बैठक में समझौते की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं था।
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार ने वार्ता को “गहन और रचनात्मक” बताया और उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष भविष्य में सकारात्मक रुख बनाए रखेंगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आगे भी दोनों देशों के बीच संवाद को बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाता रहेगा।
गौरतलब है कि 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद यह पहली बार था जब अमेरिका और ईरान के बीच इस स्तर की प्रत्यक्ष वार्ता हुई। हालांकि, समझौता न हो पाने से दो सप्ताह के नाजुक युद्धविराम की स्थिति और वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।