दुनिया की ऐतिहासिक धरोहरों पर संकट के बादल, यूनेस्को ने जताई गहरी चिंता
- Post By Admin on Jul 23 2026
बुसान : जलवायु परिवर्तन और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बढ़ते सशस्त्र संघर्षों के कारण विश्व की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों पर गंभीर संकट गहराता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने इन अमूल्य विरासत स्थलों के संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने और सामूहिक प्रयासों की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया है।
दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में आयोजित विश्व धरोहर समिति (World Heritage Committee) के 48वें सत्र के दौरान यूनेस्को के संस्कृति मामलों के सहायक महानिदेशक नायेफ अल-फायेज ने कहा कि विश्व धरोहर स्थलों का लगातार हो रहा विनाश पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है और इसका समाधान भी वैश्विक सहयोग से ही संभव है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और युद्ध जैसी परिस्थितियों के बाद नुकसान की भरपाई करने से बेहतर है कि पहले से प्रभावी रोकथाम के उपाय अपनाए जाएं। उनके अनुसार, इमारतों और स्मारकों की मरम्मत तो संभव है, लेकिन किसी समाज की सांस्कृतिक पहचान और मानसिक क्षति की भरपाई करना बेहद कठिन होता है।
नायेफ अल-फायेज ने कहा कि विश्व धरोहरों के संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकारों की नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों, इन स्थलों पर कार्य करने वाले लोगों और पर्यटकों की भी समान रूप से है। उन्होंने सभी हितधारकों से मिलकर इन ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं रखरखाव में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
विश्व धरोहर समिति का 48वां सत्र सोमवार से औपचारिक रूप से शुरू हुआ, जबकि उद्घाटन समारोह एक दिन पहले आयोजित किया गया था। वर्ष 1988 में यूनेस्को विश्व धरोहर सम्मेलन का सदस्य बनने के बाद यह पहला अवसर है जब दक्षिण कोरिया इस प्रतिष्ठित बैठक की मेजबानी कर रहा है। दस दिनों तक चलने वाला यह अंतरराष्ट्रीय सत्र अगले बुधवार तक जारी रहेगा, जिसमें विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण और नई विरासतों के नामांकन सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।