करपात्री प्राकट्य महोत्सव में गूंजा शिक्षा का भारतीय मंत्र, प्रो. राय बोले- संस्कारों के बिना अधूरा है ज्ञान

  • Post By Admin on Aug 16 2026
करपात्री प्राकट्य महोत्सव में गूंजा शिक्षा का भारतीय मंत्र, प्रो. राय बोले- संस्कारों के बिना अधूरा है ज्ञान

मुजफ्फरपुर : धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज की तपोभूमि श्री धर्मसंघ शिक्षामण्डल, दुर्गाकुंड में रविवार को ‘करपात्र प्राकट्य महोत्सव’ के अंतर्गत अखिल भारतीय शास्त्र संगोष्ठी का आयोजन किया गया। ‘समग्र शिक्षा एवं धर्मसम्राट की दृष्टि’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश चन्द्र राय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

संगोष्ठी में संतों, शिक्षाविदों, कुलपतियों और वैदिक विद्वानों ने भाग लिया। बड़ी संख्या में शोधार्थी और अध्यापक भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि प्रो. राय ने कहा कि धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज की शिक्षा दृष्टि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान करती है। आधुनिक ज्ञान-विज्ञान आवश्यक है, लेकिन उसे भारतीय प्रज्ञा, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने शिक्षा में भारतीयता के पुनर्जागरण का मार्ग प्रशस्त किया है। शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छी नौकरी हासिल करना नहीं, बल्कि सीखना, जीवन को सार्थक बनाना और समाज की सेवा करना भी है। भारतीय ज्ञान परंपरा के सूत्र ‘सा विद्या या विमुक्तये’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वास्तविक विद्या वही है, जो मनुष्य को अज्ञान, भय और अहंकार से मुक्त करे।

कुलपति ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नई तकनीकों के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि ज्ञान बढ़े, लेकिन संवेदना कम हो जाए तो ऐसी शिक्षा अधूरी मानी जाएगी। उन्होंने ज्ञान और संस्कार तथा विज्ञान और विवेक के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। काशी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए प्रो. राय ने कहा कि काशी केवल एक नगर नहीं, बल्कि स्वयं एक विश्वविद्यालय है, जो आधुनिकता और परंपरा के बीच समन्वय का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि किसी विश्वविद्यालय की पहचान केवल उसके भवनों से नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र और शिक्षकों की प्रतिबद्धता से होती है। अपने संबोधन का समापन करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा का लक्ष्य ‘ज्ञान से प्रगति, संस्कार से शक्ति, चरित्र से नेतृत्व और शिक्षा से राष्ट्र निर्माण’ होना चाहिए।

आयोजक श्री धर्मसंघ शिक्षामण्डल के महामंत्री जगजीतन पाण्डेय ने बताया कि संगोष्ठी का उद्देश्य शिक्षा को केवल सूचना प्राप्त करने का माध्यम न बनाकर उसे जीवन, संस्कार और भारतीय संस्कृति से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि स्वामी करपात्री जी महाराज की शिक्षा दृष्टि आज भी इस दिशा में प्रेरणादायी है। संगोष्ठी के बाद कुलपति प्रो. राय ने संत संवाद में भी सहभागिता की। इस दौरान उपस्थित संतों और विद्वानों के साथ सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक उन्नयन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। विश्वविद्यालय परिवार ने कुलपति प्रो. दिनेश चन्द्र राय की संगोष्ठी में सहभागिता को शिक्षा, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।