जन्म-मृत्यु कानून में बड़ा बदलाव, एक डिजिटल प्रमाणपत्र से मिलेंगी कई सरकारी सेवाएं

  • Post By Admin on Aug 05 2026
जन्म-मृत्यु कानून में बड़ा बदलाव, एक डिजिटल प्रमाणपत्र से मिलेंगी कई सरकारी सेवाएं

नई दिल्ली: भारत सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन के बाद नए प्रावधान लागू कर दिए हैं। नए नियमों का उद्देश्य नागरिक सेवाओं को सरल बनाना, फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाना और विभिन्न सरकारी सेवाओं को एकीकृत डिजिटल प्रणाली से जोड़ना है। इन बदलावों के लागू होने के बाद आम नागरिकों से जुड़ी कई प्रशासनिक प्रक्रियाओं में व्यापक परिवर्तन देखने को मिलेंगे।

नए कानून के तहत डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र (डिजिटल बर्थ सर्टिफिकेट) किसी भी भारतीय नागरिक की जन्म तिथि और जन्म स्थान का एकमात्र आधिकारिक प्रमाण माना जाएगा। यही प्रमाण पत्र स्कूल और कॉलेज में नामांकन, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने, पासपोर्ट और आधार कार्ड बनवाने, विवाह पंजीकरण तथा सरकारी नौकरियों में नियुक्ति सहित कई महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए मान्य होगा।

सरकार ने भारत के महापंजीयक (Registrar General of India) के अधीन एक केंद्रीकृत सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) पोर्टल विकसित किया है। इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड एकीकृत रूप से उपलब्ध रहेगा। इससे राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR), राशन कार्ड, संपत्ति पंजीकरण और मतदाता सूची जैसी सेवाओं का रिकॉर्ड स्वतः अपडेट किया जा सकेगा। किसी व्यक्ति की मृत्यु दर्ज होते ही उसका नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी। नए प्रावधानों के अनुसार जन्म पंजीकरण के समय बच्चे के माता-पिता अथवा अभिभावक का आधार नंबर दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। वहीं अनाथ, परित्यक्त, सरोगेसी से जन्मे बच्चों, एकल अभिभावक (सिंगल पेरेंट), अविवाहित मां तथा कानूनी रूप से गोद लिए गए बच्चों के पंजीकरण की प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक सरल और स्पष्ट बनाया गया है।

सरकार ने सभी सरकारी और निजी अस्पतालों के लिए यह भी अनिवार्य किया है कि किसी मरीज की मृत्यु के बाद उसके परिजनों को मृत्यु के कारण का प्रमाण पत्र निःशुल्क उपलब्ध कराया जाए। इससे मृत्यु पंजीकरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और परिवारों को आवश्यक दस्तावेज समय पर मिल सकेंगे। इसके अलावा यदि जन्म या मृत्यु की सूचना निर्धारित समय सीमा के भीतर दर्ज नहीं कराई जाती है, तो विलंबित पंजीकरण के लिए सख्त प्रक्रियागत नियम लागू होंगे। ऐसे मामलों में सक्षम प्राधिकारी अथवा मजिस्ट्रेट की अनुमति के बाद ही पंजीकरण संभव होगा। सरकार का मानना है कि इन नए प्रावधानों से नागरिक सेवाएं अधिक डिजिटल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनेंगी, साथ ही फर्जी दस्तावेजों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।