डायट रामबाग में स्वतंत्रता दिवस पर झंडोत्तोलन, प्रशिक्षुओं ने लिया राष्ट्र निर्माण का संकल्प

  • Post By Admin on Aug 15 2026
डायट रामबाग में स्वतंत्रता दिवस पर झंडोत्तोलन, प्रशिक्षुओं ने लिया राष्ट्र निर्माण का संकल्प

मुजफ्फरपुर: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), रामबाग परिसर में देशभक्ति एवं राष्ट्रीय गौरव के वातावरण में झंडोत्तोलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। संस्थान के प्राचार्य इंद्रजीत कुमार सिंह ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और उपस्थित लोगों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में संस्थान के व्याख्याताओं, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों, डी.एल.एड. प्रशिक्षुओं तथा संलग्न अभ्यास मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक और छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। इस दौरान विद्यार्थियों और प्रशिक्षुओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर स्वतंत्रता दिवस के उत्सव को जीवंत बनाया। कार्यक्रम का मंच संचालन पूर्ववर्ती छात्र पंकज कुमार ने किया। इस अवसर पर डॉ. पवन कुमार, सुजीत कुमार, पंकज कुमार, राकेश सिन्हा, दीपिन्ति कुमारी, अर्जुन कुमार गिरी, डॉ. उपेंद्र कुमार, डॉ. रंजीत कुमार चौधरी, अमित कुमार, विजय कुमार, रविंद्र कुमार गुप्ता, संतोष कुमार, कलामुल्लाह, प्रिय रंजन कुमार, शालिनी, रोली, साधन सेवी डॉ. राहिला और सृष्टि कुमारी सहित कई शिक्षक एवं कर्मी मौजूद रहे। शिक्षकेत्तर कर्मचारियों में प्रदीप कुमार, नेहा कुमारी, मिथिलेश कुमार, साहेब जान, दिल मुहम्मद अंसारी, जे.ई. भार्गव और एडमिन रवि कुमार सहित अन्य कर्मियों ने भी भागीदारी की।

स्वतंत्रता संघर्ष से राष्ट्र निर्माण तक का संदेश

प्राचार्य इंद्रजीत कुमार सिंह ने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के गौरवपूर्ण इतिहास को याद किया। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि आजादी के बाद भारत ने शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कृषि, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने कहा कि देश के समग्र और सतत विकास के लिए अभी भी निरंतर प्रयास की आवश्यकता है। उन्होंने प्रशिक्षुओं से अपने ज्ञान, कौशल और सकारात्मक सोच का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करने का आह्वान किया।

 ‘Freedom at Midnight’ के संदर्भ में स्वतंत्रता का अर्थ

समावेशी शिक्षा के व्याख्याता सुजीत कुमार ने अपने संबोधन में ‘Freedom at Midnight’ के संदर्भ में वर्ष 1947 की स्वतंत्रता, विभाजन और उस दौर की परिस्थितियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता केवल किसी शासन से मुक्ति का नाम नहीं है, बल्कि अपने देश और अपने आचरण के प्रति जिम्मेदारी स्वीकार करना भी है। उन्होंने 14-15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि के ऐतिहासिक क्षणों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ भारत के सामने एक नए राष्ट्र के निर्माण की चुनौती भी थी। उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू के ‘Tryst with Destiny’ भाषण का उल्लेख करते हुए स्वतंत्रता के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। सुजीत कुमार ने कहा कि 15 अगस्त जहां स्वतंत्रता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है, वहीं विभाजन के दौरान हुए विस्थापन, हिंसा और मानवीय पीड़ा की स्मृति से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए स्वतंत्रता दिवस हमें एकता, भाईचारे, शांति और मानवीय संवेदनाओं की रक्षा का संदेश देता है।

स्वतंत्रता से जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण तक

उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के संदेश को पांच प्रमुख अवधारणाओं के रूप में प्रस्तुत किया—

स्वतंत्रता → जिम्मेदारी → एकता → शांति → राष्ट्र निर्माण

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल ध्वजारोहण और देशभक्ति कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। यह दिन स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के निर्वहन का संकल्प लेने का अवसर भी है। उन्होंने प्रशिक्षुओं से जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठकर आपसी सम्मान एवं सहयोग की भावना विकसित करने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर किए गए सकारात्मक कार्यों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकता है।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पूर्वजों ने देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए संघर्ष किया, अब वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह शिक्षा, एकता, शांति और बेहतर चरित्र के माध्यम से इस स्वतंत्रता को और मजबूत करे। कार्यक्रम का समग्र वातावरण राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता और राष्ट्र निर्माण की भावना से परिपूर्ण रहा। अंत में उपस्थित सभी लोगों ने स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को नमन करते हुए देश की एकता, अखंडता और प्रगति में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।