बीएमसी मेयर को लेकर सस्पेंस बरकरार, एक साल के फार्मूले पर शिवसेना–भाजपा आमने-सामने

  • Post By Admin on Jan 19 2026
बीएमसी मेयर को लेकर सस्पेंस बरकरार, एक साल के फार्मूले पर शिवसेना–भाजपा आमने-सामने

मुंबई : महाराष्ट्र में हाल ही में संपन्न हुए महानगरपालिका चुनावों में भाजपा और शिवसेना गठबंधन को बड़ी सफलता मिलने के बावजूद मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के मेयर पद को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। जीत के बाद अब दोनों दलों के बीच मेयर पद के बंटवारे को लेकर राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है।

सूत्रों के अनुसार, शिवसेना ने मेयर पद को लेकर नया फॉर्मूला सामने रखा है। पार्टी ने मांग की है कि पहले एक वर्ष के लिए मेयर पद शिवसेना को दिया जाए। शिवसेना का तर्क है कि 23 जनवरी को पार्टी प्रमुख रहे बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी है और इस विशेष अवसर को देखते हुए पहले साल मेयर पद शिवसेना के पास रहना चाहिए। पार्टी इसे बाल ठाकरे को श्रद्धांजलि के रूप में पेश कर रही है। इससे पहले शिवसेना ढाई-ढाई साल के फार्मूले पर अड़ी थी, लेकिन सहमति न बनती देख अब उसने एक साल का प्रस्ताव रखा है।

शिवसेना यह भी दलील दे रही है कि केंद्र और राज्य की राजनीति में कठिन परिस्थितियों के दौरान उसने भाजपा का साथ निभाया है। ऐसे में गठबंधन धर्म का निर्वहन करते हुए बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी वर्ष में पहले साल शिवसेना का मेयर बनाया जाए, जबकि शेष चार वर्षों के लिए मेयर पद भाजपा के पास रहे।

इधर, मेयर चुनाव को लेकर भाजपा भी पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। मुंबई भाजपा ने अपने सभी 89 नवनिर्वाचित पार्षदों को अगले 10 दिनों तक शहर से बाहर न जाने का निर्देश जारी किया है। साथ ही किसी आपात स्थिति में बाहर जाने से पहले पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सूचित करने को कहा गया है।

बताया जा रहा है कि नए मेयर के चुनाव में अभी 8 से 10 दिन का समय लग सकता है। बीएमसी में मेयर चुने जाने के लिए 114 पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता होती है। महायुति गठबंधन के पास बहुमत से महज चार वोट अधिक हैं। ऐसे में किसी भी तरह की राजनीतिक चूक से बचने के लिए भाजपा अपने सभी पार्षदों को मुंबई में ही बनाए रखना चाहती है।

फिलहाल मुंबई के मेयर पद को लेकर सस्पेंस बरकरार है और सभी की नजरें भाजपा-शिवसेना के बीच बनने वाली सहमति पर टिकी हुई हैं।