पीएम मोदी-सुखबीर बादल की मुलाकात से पंजाब की राजनीति गरमाई, BJP-SAD गठबंधन की अटकलें तेज
- Post By Admin on Aug 08 2026
नई दिल्ली : पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। संसद भवन में हुई इस बैठक के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या पंजाब में भारतीय जनता पार्टी और अकाली दल एक बार फिर साथ आ सकते हैं।
सुखबीर सिंह बादल शुक्रवार सुबह दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। बैठक के बाद उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ पंजाब की कानून व्यवस्था, राज्य की प्रशासनिक स्थिति और सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों को प्रधानमंत्री के समक्ष रखा गया। हालांकि बैठक का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे पंजाब की बदलती सियासत के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा और अकाली दल के संभावित पुनर्गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
गौरतलब है कि भाजपा और शिरोमणि अकाली दल ने लगभग ढाई दशक तक पंजाब में गठबंधन के तहत चुनाव लड़े थे। दोनों दलों को इस साझेदारी का राजनीतिक लाभ भी मिलता रहा। लेकिन 2020 में कृषि कानूनों और किसानों के आंदोलन के मुद्दे पर दोनों के बीच मतभेद बढ़ गए और 25 साल पुराना गठबंधन टूट गया। इसके बाद 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और अकाली दल अलग-अलग मैदान में उतरे। दोनों दलों के प्रदर्शन ने यह संकेत दिया कि पंजाब की राजनीति में उनकी स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं रही।
इसी पृष्ठभूमि में 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सुखबीर बादल और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात को संभावित राजनीतिक पुनर्समायोजन के रूप में देखा जा रहा है। राज्य में आम आदमी पार्टी की भगवंत मान सरकार के खिलाफ भाजपा, अकाली दल और कांग्रेस लगातार विभिन्न मुद्दों पर हमलावर हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा और अकाली दल फिर से साथ आते हैं तो पंजाब की चुनावी तस्वीर में बड़ा बदलाव संभव है। हालांकि दोनों दलों की ओर से अभी तक गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन इस मुलाकात ने पंजाब की राजनीति में नए कयासों को जरूर जन्म दे दिया है।