कोयले के विकल्प के तौर पर मजबूत हो रही ग्रीन एनर्जी, 25 साल के लिए ₹5.25 की बिजली

  • Post By Admin on Aug 20 2026
कोयले के विकल्प के तौर पर मजबूत हो रही ग्रीन एनर्जी, 25 साल के लिए ₹5.25 की बिजली

नई दिल्ली: भारत में सौर और पवन ऊर्जा अब केवल दिन के समय मिलने वाली बिजली तक सीमित नहीं रहने वाली है। बैटरी स्टोरेज के साथ नवीकरणीय ऊर्जा को लगातार और मांग के अनुरूप बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) की 1,000 मेगावाट की राउंड-द-क्लॉक नवीकरणीय ऊर्जा नीलामी में ₹5.25 प्रति यूनिट की दर सामने आई है। इस व्यवस्था के तहत बिजली खरीद की अवधि 25 साल तक रखी गई है।

इस मॉडल की खासियत यह है कि बिजली उत्पादन केवल सूरज की रोशनी पर निर्भर नहीं रहेगा। दिन में पैदा होने वाली अतिरिक्त सौर ऊर्जा को बैटरी स्टोरेज में सुरक्षित रखा जा सकेगा और जरूरत के समय, खासकर शाम और रात में, उसका इस्तेमाल किया जा सकेगा।

1,000 मेगावाट की नीलामी में कड़ी प्रतिस्पर्धा

SECI की नीलामी में कुल 1,000 मेगावाट क्षमता आवंटित की गई। सात डेवलपर्स को परियोजनाएं मिलीं और बोली दरें ₹5.25 से ₹5.26 प्रति यूनिट के बीच रहीं। स्टोरेज को शामिल करने के बावजूद इतनी प्रतिस्पर्धी दर सामने आना ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि बैटरी स्टोरेज और नवीकरणीय ऊर्जा के संयोजन की लागत धीरे-धीरे अधिक प्रतिस्पर्धी हो रही है।

दिन की सौर बिजली रात में आएगी काम

सौर ऊर्जा की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसका उत्पादन सूर्य की रोशनी पर निर्भर करता है। दिन में बिजली का उत्पादन अधिक होता है, लेकिन शाम और रात में भी बिजली की मांग बनी रहती है। बैटरी इसी अंतर को पाटने में अहम भूमिका निभाती है। राउंड-द-क्लॉक मॉडल में बिजली उत्पादकों को केवल बिजली पैदा करने की जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि निर्धारित समय पर तय मात्रा में बिजली उपलब्ध कराना भी जरूरी होता है। पीक घंटों में उच्च उपलब्धता सुनिश्चित करने की शर्तें रखी गई हैं। निर्धारित आपूर्ति में कमी रहने पर आर्थिक दंड का प्रावधान भी किया गया है। इसका मतलब है कि केवल बड़े पैमाने पर सोलर पैनल लगाना पर्याप्त नहीं होगा। परियोजना को उस समय भी बिजली उपलब्ध करानी होगी, जब सूर्य की रोशनी उपलब्ध नहीं है।

उद्योगों के लिए बन सकता है बड़ा विकल्प

24 घंटे बिजली की जरूरत वाले डेटा सेंटर, स्टील, एल्युमिनियम और अन्य ऊर्जा-गहन उद्योगों के लिए स्टोरेज आधारित नवीकरणीय बिजली महत्वपूर्ण विकल्प बन सकती है। लंबी अवधि के लिए निर्धारित कीमत और स्वच्छ बिजली की उपलब्धता उद्योगों को भविष्य की ऊर्जा लागत की बेहतर योजना बनाने में मदद कर सकती है। इससे विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

भारत की ऊर्जा व्यवस्था में बड़ा बदलाव

भारत ने पिछले डेढ़ दशक में सौर और पवन ऊर्जा की क्षमता में तेजी से विस्तार किया है। अब चुनौती केवल अधिक नवीकरणीय बिजली पैदा करने की नहीं, बल्कि जरूरत के समय उसे उपलब्ध कराने की है। बैटरी स्टोरेज इस बदलाव की अहम कड़ी बन रहा है। यदि आने वाले वर्षों में बैटरी की लागत और कम होती है तथा ऐसे प्रोजेक्ट बड़े पैमाने पर विकसित होते हैं, तो सौर और पवन ऊर्जा को 24x7 भरोसेमंद बिजली के स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने की संभावनाएं और मजबूत हो सकती हैं। हालांकि, ₹5.25 प्रति यूनिट की दर को हर परिस्थिति में कोयले से सस्ती बिजली कहना उचित नहीं होगा। वास्तविक लागत की तुलना परियोजना की स्टोरेज, ट्रांसमिशन, वित्तीय लागत और बिजली खरीद की शर्तों को ध्यान में रखकर करनी होगी। इसके बावजूद स्टोरेज के साथ नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है।